Donald Trump Tariff On India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार (2 अप्रैल) को व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में ‘मुक्ति दिवस’ (Liberation Day) की घोषणा करते हुए भारत, चीन, जापान और यूरोपीय संघ जैसे कई देशों पर भारी टैरिफ लगाने की नीति पेश की. इस नई नीति के तहत, भारत से आयात होने वाले प्रोडक्ट पर 26 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा.
व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में ‘मुक्ति दिवस’ की घोषणा करते हुए ट्रंप ने कहा कि मेरे साथी अमेरिकियों, यह मुक्ति दिवस है, जिसका लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था. 2 अप्रैल 2025 को वह दिन माना जाएगा जब अमेरिकी उद्योग का पुनर्जन्म हुआ, अमेरिका की किस्मत बदली और हमने अमेरिका को फिर से समृद्ध बनाना शुरू किया है.
US President Donald Trump imposes 26% “reciprocal tariffs” on India, followed by 34% on China, 20% on EU, and 24% on Japan pic.twitter.com/0uhLSCKSOV
— ANI (@ANI) April 2, 2025
भारत पर क्यों लगाया गया टैरिफ?
ट्रंप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना सबसे अच्छा दोस्त बताया. हालांकि, उन्होंने कहा कि इसके बावजूद भारत अमेरिका के साथ सही व्यवहार नहीं कर रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर 52 फीसदी शुल्क लगाता है, इसलिए अमेरिका भी बदले में 26 फीसदी टैरिफ लगाएगा.
कौन-कौन से देश प्रभावित हुए?
ट्रंप की नई ‘पारस्परिक टैरिफ’ (Reciprocal Tariffs) नीति के तहत, कई देशों पर टैरिफ लगाए गए हैं:
देश टैरिफ (%)
भारत 26%
चीन 34%
यूरोपीय संघ 20%
जापान 24%
ताइवान 22%
इजरायल 17%
नई टैरिफ नीति का असर क्या होगा?
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पहले से ही कई मुद्दों को लेकर तनाव में रहा है.यह टैरिफ भारतीय कंपनियों के लिए अमेरिका में व्यापार करना महंगा बना सकता है.भारतीय उत्पादों पर अधिक शुल्क लगाने से अमेरिकी उपभोक्ताओं को महंगे सामान खरीदने पड़ सकते हैं.कई अमेरिकी कंपनियां, जो भारत से कच्चा माल या तैयार उत्पाद आयात करती हैं उनकी लागत भी बढ़ सकती है.
अंतरराष्ट्रीय ट्रेड वॉर की संभावना
भारत और अन्य प्रभावित देश जवाबी कदम उठा सकते हैं और अमेरिकी उत्पादों पर टैरिफ बढ़ा सकते हैं.इससे वैश्विक व्यापार युद्ध की स्थिति बन सकती है. हालांकि, ट्रंप का दावा है कि यह टैरिफ अमेरिकी अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करेगा. उनका कहना है कि यह टैरिफ नीतियां वास्तव में काफी अच्छी हैं. हमने इससे भी ज्यादा शुल्क लगाने की योजना बनाई थी, लेकिन हमने इसे कम रखा. हालांकि, कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यह नीति अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकती है क्योंकि इससे वैश्विक व्यापारिक संबंध कमजोर हो सकते हैं.
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