सीरिया के साथ जंग में भारी पड़ रहा अबू मोहम्मद अल-जुलानी, जानिए कौन से HTS कमांडर

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सीरिया के साथ जंग में भारी पड़ रहा अबू मोहम्मद अल-जुलानी, जानिए कौन से HTS कमांडर

Syria Civil War : सीरिया में एक बार फिर से गृह युद्ध भड़क गया है. इसमें पिछल एक हफ्ते से सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद की सेना और इस्लामिक संगठन के बीच जमकर लड़ाई हो रही है. सीरियाई सेना और विद्रोहियों के बीच यह लड़ाई अलेप्पो पर हमले और कब्जे के बाद तेज हो गई है. 2016 के करीब आठ साल के बाद सीरिया के किसी शहर पर इतना बड़ा बड़ा हमला हुआ है. जिसके पीछे हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के नेता अबू मोहम्मद अल-जुलानी  मास्टरमाइंड है.

सीरिया में गृह युद्ध के बीच अल वतन नाम के एक सीरियाई अखबार ने बताया कि इदलिब में तहरीर अल-शाम के मुख्यालय पर हमले में विद्रोही गुट का सरगना अबू मोहम्मद अल जुलानी मारा गया है. हालांकि अभी तक जुलानी की मौत की पुष्टि नहीं हुई है. बता दें कि सीरिया के मौजूदा हालात पर इराक, ईरान, रूस के अलावा इजरायल और अमेरिका की भी नजर बनी हुई है.

सीरियाई शासन पर अल-जुलानी बना हुआ है खतरा

इजरायली अखबार वायनेट के मुताबिक, सीरिया का HTS ऐसा विद्रोही गुट है, जो पहले अल कायदा से जुड़ा रहा है. सीरियाई शासन के खिलाफ पिछले कुछ सालों में लड़ने वाला HTS प्रमुख गुट है. अल-जुलानी कई सालों से सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के लिए लगातार खतरा बना हुआ है.

अल-जुलानी और HTS की जानें ताकत

HTS सीरिया के शासन और ईरान समर्थित मिलिशिया के खिलाफ लड़ने वाला सबसे बड़ा गुट है. इसने इदलिब, अलेप्पो और हमा के इलाकों में कई गांवों पर कब्जा कर लिया है. इस गुट का मौजूदा कमांडर अबू मोहम्मद अल-जुलानी है. जुलानी अल कायदा में अबू मुसाब अल-जरकावी का भी करीबी रहा है. जुलानी को अमेरिकी सेना ने गिरफ्तार किया था, लेकिन 2008 में उसे रिहा कर दिया गया. इसके बाद 2012 में उसने जबात अल-नुसरा की स्थापना की और सीरिया में असद शासन के खिलाफ लड़ाई छेड़ दी.

मौजूदा स्थिति में कौन किस पर भारी?

सीरिया में जारी वर्तमान गृह युद्ध में इजरायल के तेल अवीव विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एयाल जिसर सीरिया की वर्तमान स्थिति पर कहते हैं, ‘वर्तमान में बशर अल-असद का शासन कमजोर स्थिति में है. अलेप्पो पर विद्रोहियों का कब्जा शहर के आकार और आर्थिक महत्व के कारण असद शासन के लिए एक बड़ा झटका है. विद्रोहियों का सामना करने के लिए असद शासन अब अपने सहयोगियों पर बहुत अधिक निर्भर है, लेकिन विद्रोहियों को पीछे हटाने के लिए सिर्फ रूस के हवाई हमले काफी नहीं होंगे.’

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