QUAD: एस जयशंकर को रहना होगा सतर्क, चीन-अमेरिका की दुश्मनी में भारत को मोहरा तो नहीं बना रहे डोनाल्ड ट्रंप!

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QUAD: एस जयशंकर को रहना होगा सतर्क, चीन-अमेरिका की दुश्मनी में भारत को मोहरा तो नहीं बना रहे डोनाल्ड ट्रंप!

Last Updated:January 22, 2025, 14:47 IST

QUAD And S. Jaishankar: डोनाल्ड ट्रंप के शपथ ग्रहण के बाद क्वाड समूह की बैठक हुई जिसमें भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका ने बलपूर्वक यथास्थिति बदलने की कोशिशों का विरोध किया. लेकिन किसी ने सीधे तौर पर चीन का…और पढ़ें

क्वाड की अगली बैठक भारत में होने वाली है.

QUAD And S. Jaishankar: अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के तुरंत बाद डोनाल्ड ट्रंप एक्शन में आ गए हैं. ट्रंप प्रशासन ने शपथ ग्रहण के अगले दिन ही चीन को घेरने के लिए बने क्वाड समूह की बैठक आयोजित की. इस बैठक के बाद क्वाड के सदस्य देशों भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में एक स्वर में कहा कि दुनिया में बलपूर्वक यथास्थिति को बदलने की कोशिश करने वाली किसी भी एकतरफा कार्रवाई का कड़ा विरोध किया जाएगा. इस बयान में सीधे तौर पर चीन का नाम नहीं लिया गया. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग और जापान के विदेश मंत्री इवाया ताकेशी के साथ शीर्ष अमेरिकी राजनयिक के रूप में अपनी पहली बहुपक्षीय बैठक की मेजबानी की.

लगभग एक घंटे तक जारी बैठक के समापन पर मंत्रियों ने भारत में होने जा रहे क्वाड लीडरशिप समिट की बात कही. माना जा रहा है कि इस साल अप्रैल में भारत क्वाड देशों की मेजबानी करेगा और उसने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शामिल होंगे. क्वाड देशों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया कि हमारे चार राष्ट्र इस बात पर कायम हैं कि समुद्री क्षेत्र सहित सभी क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय कानून, आर्थिक अवसर, शांति, स्थिरता और सुरक्षा, हिंद प्रशांत के लोगों के विकास और समृद्धि का आधार हैं. हम बलपूर्वक या जबरदस्ती यथास्थिति को बदलने की कोशिश करने वाली किसी भी एकतरफा कार्रवाई का कड़ा विरोध करते हैं.

चीन का नाम लेने से बचे देश
बयान के अनुसार हम बढ़ते खतरों के मद्देनजर क्षेत्रीय समुद्री, आर्थिक और प्रौद्योगिकी सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ विश्वसनीय और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम आने वाले महीनों में क्वाड के काम को आगे बढ़ाने के लिए तत्पर हैं और भारत द्वारा आयोजित अगले क्वाड लीडर्स समिट की तैयारी के लिए नियमित आधार पर मिलेंगे. बयान में कहा गया है कि क्वाड मंत्रियों ने ‘स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत’ को मजबूत करने के लिए अपनी साझा प्रतिबद्धता की भी पुष्टि की, जहां कानून का शासन, लोकतांत्रिक मूल्य, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को बरकरार रखा जाता है और उसकी रक्षा की जाती है.

क्वाड में भारत की भूमिका
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि डोनाल्ड ट्रंप जिस तरह से चीन से प्रति आक्रामक रुख रखते हैं क्या उससे भारत सहमत है. निश्चित तौर पर भारत और चीन के रिश्ते बहुत अच्छे नहीं नहीं हैं. दोनों देशों के बीच सीमा विवाद बहुत पुराना है. आज भी दोनों देशों ने सीमा और एलएलसी पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती कर रखी है. बावजूद इसके भारत की अपनी एक स्वतंत्र विदेश नीति है. वह एक बहुपक्षीय दुनिया की व्यवस्था में भरोसा करता है. यूक्रेन-रूस युद्ध की बात हो या फिर मध्य पूर्व में इजरायल-ईरान के बीच तनावपूर्ण रिश्ते… इन सभी मसलों पर भारत ने एक संतुलित रुख अपनाया है. मौजूदा वक्त में अमेरिका और रूस के रिश्ते सबसे बुरे दौर में है. भारत पर रूस से रिश्ते खत्म करने के लिए अमेरिका ने भारी दबाव बनाता है. लेकिन, भारत ने ऐसी स्थिति में भी अपनी एक स्वतंत्र विदेश नीति का परिचय दिया.

जहां तक क्वाड की बात है तो भारत की यही स्थिति इस समूह को चीन के प्रति एक आक्रामक समूह नहीं बनने देता. भारत किसी भी कीमत पर किसी दूसरे की हित को साधने में उसका साझेदार नहीं बनना चाहता. आधिकारित तौर पर भारत ने कभी भी क्वाड को चीन के खिलाफ बना समूह नहीं बताया है. दूसरी तरफ अमेरिका और चीन के बीच विवाद है. डोनाल्ड ट्रंप अपनी इस मुहिम में भारत का साथ चाहते हैं लेकिन, भारत को सचेत रहना होगा. भारत किसी भी देश की अनुचित मांगों पर उसका समर्थन नहीं कर सकता. भले ही वो देश अमेरिका ही क्यों न हो.

भारत की विदेश नीति और कूटनीति के जानकार इस बात को भलीभांती समझते हैं. भारत एक विकासशील देश है. उसे अपनी आवाम की जिंदगी बेहतर करने लिए तेज गति से आर्थिक प्रगति करना है. ऐसे में उसको दुनिया के हर देश के साथ वन टू वन रिश्ते कायम करने हैं. ऐसे में वह दो पक्षों के बीच विवाद में किसी एक का साथ देना नहीं चाहेगा.

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QUAD: जयशंकर को रहना होगा सतर्क, चीन-अमेरिका की दुश्मनी में भारत न बने मोहरा!

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