डोनाल्ड ट्रंप के दूसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति बनने और उनके फैसले के बाद 104 भारतीयों की वतन वापसी के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की यात्रा पर जा रहे हैं. 13 फरवरी को प्रधानमंत्री की मुलाकात राष्ट्रपति ट्रंप से होनी तय है. प्रधानमंत्री मोदी के तीसरी बार प्रधानमंत्री बनने के दरम्यान अमेरिका चार-चार राष्ट्रपति देख चुका है. जब नरेंद्र मोदी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने तो उस वक्त अमेरिका के राष्ट्रपति बाराक ओबामा थे, जो डेमोक्रेटिक थे. फिर ट्रंप आए जो रिपब्लिकन थे. फिर जो बाइडेन आए, वो भी डेमोक्रेटिक थे और अब फिर से ट्रंप हैं, जो रिपब्लिकन हैं.
अमेरिका के साथ कारोबारी रिश्तों से इतर व्यक्तिगत संबंधों की शुरुआत हुई थी बाराक ओबामा के वक्त से, जब प्रधानमंत्री बनने के ठीक बाद नरेंद्र मोदी अमेरिका की यात्रा पर पहुंचे थे. इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति बाराक ओबामा को मॉर्टिन लूथर किंग जूनियर की समाधि पर जाना था. राष्ट्रपति ओबामा की लिमोजिन कार में सवार होकर 10-12 की दूरी तय करनी थी. इस दौरान ओबामा ने पीएम मोदी से मां पर सवाल किया तो पीएम मोदी ने कहा- ‘शायद आपको भरोसा न हो, लेकिन मेरी मां जितने बड़े घर में रहती थी, आपकी कार उससे भी बड़ी है.’
पीएम मोदी के इस बयान ने बाराक ओबामा को इस कदर प्रभावित किया कि दो देशों की दोस्ती, दो नेताओं की दोस्ती में तब्दील हो गई. उसके बाद जब भी प्रधानमंत्री मोदी की बाराक ओबामा से मुलाकात हुई तो प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें मित्र बाराक कहकर ही संबोधित किया. अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जनरल को दिए इंटरव्यू में भी खुद प्रधानमंत्री मोदी ने कबूल किया कि उनकी और बाराक ओबामा की दोस्ती कुछ खास है. तभी तो 26 जनवरी 2015 को गणतंत्र दिवस की परेड में जब बाराक ओबामा बतौर मुख्य अतिथि भारत पहुंचे तो प्रधानमंत्री मोदी ने सारे प्रोटोकॉल तोड़ दिए और एयरपोर्ट पर ही उनसे गले लग गए.
यही वजह है कि 20 जनवरी 2017 को जब बाराक ओबामा के कार्यकाल का आखिरी दिन था तो उस वक्त तक प्रधानमंत्री मोदी और ओबामा की कुल 8 बार मुलाकात हो चुकी थी और अपने कार्यकाल के खत्म होने के ठीक एक दिन पहले 19 जनवरी 2017 को भी बाराक ओबामा ने प्रधानमंत्री मोदी को फोन करके थैंक्यू कहा था.
अमेरिकी राष्ट्रपति से दोस्ती की कहानी तब और भी बड़ी हो गई जब 20 जनवरी 2017 को डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने. डेमोक्रेटिक रहे ओबामा से गाढ़ी हुई दोस्ती के बीच रिपब्लिकन ट्रंप के साथ दोस्ती कायम करने में प्रधानमंत्री मोदी को थोड़ा वक्त लगा. हालांकि, ट्रंप और मोदी की पहली मुलाकात 26 जून 2017 को ही हो गई थी और तब दोस्ती की पहल करते हुए खुद ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी को गले लगाया था, लेकिन दो साल के अंतराल में ये दोस्ती इतनी गाढ़ी हो गई कि नरेंद्र मोदी जब अमेरिका के टेक्सास पहुंचे तो वहां उनके लिए एक खास कार्यक्रम आयोजित था, जिसका नाम रखा गया था हाउडी मोदी.
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने एक तरह से ट्रंप का चुनाव प्रचार तक कर दिया और नारा दे दिया कि अबकी बार ट्रंप सरकार. इस नारे के बीच प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की गले लगते तस्वीरें खूब वायरल हुई थीं. इसके करीब चार महीने बाद ही ट्रंप का भारत दौरा हुआ तो प्रधानमंत्री मोदी ने अपने दोस्त के लिए अपने गृह नगर गुजरात के अहमदाबाद में बाकायदा एक आयोजन करवाया और नाम दिया नमस्ते ट्रंप. इस बीच ट्रंप मोदी की तारीफ करते रहे और ट्रंप मोदी की. हालांकि बीच-बीच में कारोबार को लेकर, टैरिफ को लेकर, कश्मीर को लेकर ट्रंप कुछ ऐसे बयान देते रहे, जिससे भारत के साथ रिश्तों पर सीधा असर पड़ा, लेकिन तब भी मोदी और ट्रंप की दोस्ती बनी रही.
नरेंद्र मोदी के जो बाइडेन के साथ भी रिश्ते व्यक्तिगत वाली श्रेणी के ही रहे. प्रधानमंत्री मोदी जब बाइडेन के कार्यकाल में अमेरिकी यात्रा पर पहुंचे तो जो बाइडेन ने उनकी मेजबानी की और मेहमाननवाजी के लिए डिनर का आयोजन किया, जिसका इंतजाम खुद जो बाइडेन की पत्नी जिल बाइडेन ने किया था. प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस दोस्ती को कायम रखा और जो बाइडेन की पत्नी जिल बाइडेन के लिए 7.5 कैरेट का हीरा उपहार में लेकर गए. जब जो बाइडेन भी जी 20 में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे, तब भी जी 20 से अलग प्रधानमंत्री आवास में करीब 50 मिनट तक पीएम मोदी और राष्ट्रपति जो बाइडेन की अलग से मुलाकात हुई, जिसने खूब सुर्खियां बटोरीं.
अब जब प्रधानमंत्री मोदी फिर से अपने पुराने दोस्त और अमेरिका के नए बने राष्ट्रपति ट्रंप से मिलने जा रहे हैं, तो सबकी नजर इसी दोस्ती पर है क्योंकि 2017 वाले ट्रंप और 2025 वाले ट्रंप में अब इतना फर्क आ गया है कि शायद ट्रंप को अब किसी की दोस्ती की भी परवाह नहीं है. पहले टैरिफ पर बयानबाजी, फिर डॉलर पर हंगामा और अब अप्रवासियों को भारत भेजने के तरीके पर जैसे सवाल उठे हैं, क्या ट्रंप पीएम मोदी से दोस्ती के नाते उसमें कुछ रियायत देंगे या फिर अमेरिका फर्स्ट के लिए ट्रंप पुरानी दोस्ती ठुकरा देंगे.
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