Last Updated:April 02, 2025, 09:49 IST
US Tariff News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ फैसले से वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल बढ़ गई है. भारत और चीन जैसे विरोधी देश अब एकजुट हो रहे हैं. जापान और दक्षिण कोरिया भी ट्रंप की नीतियों से प्रभावि…और पढ़ें
ट्रंप के टैरिफ का मुकाबला करने के लिए भारत चीन साथ आ रहे हैं. (Reuters)
हाइलाइट्स
- ट्रंप के टैरिफ से वैश्विक अर्थव्यवस्था में हलचल बढ़ी
- भारत, चीन और रूस ट्रंप के टैरिफ का मुकाबला करने को तैयार
- जापान और दक्षिण कोरिया भी ट्रंप की नीतियों से प्रभावित
बीजिंग/वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को लेकर दुनिया डरी हुई है. बुधवार को वह दुनिया भर के देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान कर सकते हैं. उनका कहना है कि यह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत करेगा. ट्रंप भले अमेरिका का भला सोच रहे हैं, लेकिन उनका यह कदम बाकी देशों के लिए संकट पैदा कर सकता है. भारत और चीन समेत दुनिया भर के देशों के लिए यह टेंशन बढ़ाने वाला है. ट्रंप को जवाब देने के लिए अब दुनिया भर के देश जो एक-दूसरे के विरोधी हैं वे भी साथ आ रहे हैं. भारत के पीएम नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ट्रंप से लड़ने की तैयारी कर रहे हैं. इसका संकेत साफ दिखता है.
चीन के विदेश मंत्री वांग यी इस समय रूस पहुंचे हैं. उनका रूस पहुंचना संयोग नहीं लगता. दरअसल ट्रंप के टैरिफ से चीन को अमेरिकी बाजार में बड़ा नुकसान हो सकता है, क्योंकि वहां उसका निर्यात महंगा हो जाएगा. ऐसे में रूस जैसे सहयोगी के साथ हाथ मिलाना चीन की रणनीति का हिस्सा हो सकता है. रूस पहले से ही चीन को तेल और गैस बेचता है, और अब दोनों देश व्यापार बढ़ाकर अमेरिकी दबाव का जवाब दे सकते हैं. वहीं अगर थोड़ा पीछे जाएं तो भारत और चीन जो पारंपरिक रूप से एक दूसरे के विरोधी हैं, उन्हें भी ट्रंप ने साथ ला दिया है. भारत और चीन के रिश्तों में भी गर्मजोशी दिख रही है. इसके तीन संकेत साफ हैं.
भारत-चीन में नजदीकी
- जिनपिंग की राष्ट्रपति मुर्मू से बातचीत: मंगलवार को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बात की. उन्होंने दोनों देशों के बीच सहयोग की बात कही है. जिनपिंग ने यह बात तब की जब दोनों देश 75 साल पुराने रिश्तों का जश्न मना रहे थे. लेकिन समय इसे ट्रंप की टैरिफ नीति से जोड़ता है. भारत भी टैरिफ से प्रभावित हो सकता है, ऐसे में यह एकजुटता की शुरुआत हो सकती है.
- भारतीय विदेश सचिव का दूतावास दौरा: भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी मंगलवार को ‘प्रोटोकॉल तोड़कर’ चीनी दूतावास पहुंचे. चीनी दूतावास में आयोजित 75वीं वर्षगांठ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए. भारत-चीन संबंधों के लिए यह एक महत्वपूर्ण संकेत है. आमतौर पर ऐसे आयोजनों में मंत्रालय के सचिव स्तर के अधिकारी ही भाग लेते हैं, लेकिन विदेश सचिव की मौजूदगी दिखाती है कि भारत भी चीन से संबंधों को महत्व दे रहा है.
- भारत से ज्यादा सामान खरीदेगा चीन: चीन ने कहा कि वह भारत से ज्यादा सामान खरीदेगा. भारत का चीन को निर्यात अभी कम है जबकि आयात बहुत ज्यादा है. राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर चीन के राजदूत शू फीहोंग ने मंगलवार को कहा कि हम भारत से और भी ज्यादा सामान खरीदना चाहते हैं. भारत के व्यापार मंत्रालय के अनुसार, 2023-24 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 101.7 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया. लेकिन इसमें भारत को बड़ा व्यापार घाटे का सामना करना पड़ा. भारत का चीन को निर्यात सिर्फ 16.6 बिलियन डॉलर है.
सबसे बड़े विरोधी भी आए साथ
ट्रंप के टैरिफ ने बड़े-बड़े विरोधियों को साथ ला दिया है. सबसे हैरानी की बात है कि एक दूसरे को फूटी आंख न सुहाने वाले देश चीन, जापान और दक्षिण कोरिया रविवार को एक साथ आए. ये तीनों अमेरिका को बड़े पैमाने पर सामान बेचते हैं, और ट्रंप का 25 फीसदी ऑटो टैरिफ इनकी अर्थव्यवस्था को झटका दे सकता है. इनका प्लान है कि वे अपने बीच व्यापार बढ़ाएं और एक मुक्त व्यापार समझौते पर काम करें. यह ट्रंप के खिलाफ एक ‘क्षेत्रीय ढाल’ बनाने की कोशिश है, लेकिन जापान और दक्षिण कोरिया की चीन के साथ तनाव इसे कितना प्रभावी बनाएगा यह देखने वाला होगा.
आर्थिक जंग के रास्ते पर दुनिया?
ट्रंप भले कहें कि उनका टैरिफ अमेरिका को फायदा दे सकता है, लेकिन इससे अमेरिकी जनता को भी महंगा सामान खरीदना पड़ेगा. ट्रंप के टैरिफ का खतरा दुनिया के बाकी देशों को एकजुट कर रहा है. भारत-चीन की नजदीकी एशिया में नया व्यापारिक ब्लॉक बना सकता है. जापान और दक्षिण कोरिया जैसे अमेरिकी के सहयोगी भी ट्रंप के टैरिफ से डरे हैं. ऐसे हालात में वह अपने हितों को देख रहे हैं. लेकिन लंबे वक्त तक ट्रंप का टैरिफ दुनिया को नए ‘आर्थिक जंग’ के रास्ते पर ले जा सकता है, जहां अमेरिका अकेला पड़ जाएगा.
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