Last Updated:April 01, 2025, 00:00 IST
पेंटागन के लीक दस्तावेज से पता चलता है कि रूस के हमले पर अमेरिका यूरोप की मदद नहीं करेगा, बल्कि चीन पर ध्यान केंद्रित करेगा और यूरोप को रक्षा खर्च बढ़ाने की सलाह दी है.
ट्रंप के इरादे का खौफनाक खुलासा हुआ है.
हाइलाइट्स
- अमेरिका रूस के हमले पर यूरोप की मदद नहीं करेगा.
- अमेरिका यूरोप को रक्षा खर्च बढ़ाने की सलाह दे रहा है.
- अमेरिका अब चीन पर ध्यान केंद्रित करेगा.
अब तक जब भी यूरोपीय देशों पर कोई बुरी नजर डालता था तो अमेरिका आगे बढ़कर उनकी रक्षा करता था. लेकिन पेंटागन के लीक दस्तावेज से संकेत मिलता है कि रूस के हमले की स्थिति में अमेरिका अब यूरोप की सहायता नहीं करेगा. वाशिंगटन पोस्ट ने रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के हवाले से बताया कि अगर रूस यूरोप के किसी भी देश पर हमला करता है तो ट्रंप प्रशासन किसी भी समय यूरोप को मदद देने की स्थिति में नहीं होगा.
इंटरिम नेशनल डिफेंस स्ट्रेटजिक गाइडेंस की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका अपनी परमाणु प्रतिरोधक क्षमताओं के साथ यूरोप का समर्थन करेगा, लेकिन यूरोपीय देशों को अपने ही सैनिकों पर भरोसा करना होगा. हालांकि इनकी क्षमता इतनी ज्यादा नहीं है कि वे चीन को रूस को रोक पाएं. यह खुलासा हेगसेथ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के हालिया बयानों से मेल खाता है, जिसमें उन्होंने यूरोपीय सहयोगियों से अपने रक्षा खर्च को बढ़ाने और अमेरिका पर निर्भरता कम करने का आग्रह किया था.
कहां बनेंगे संघर्ष के हालात
लीक खुफिया रिपोर्ट में चीन को लेकर चिंता जताई गई है. ये भी कहा गया है कि प्रशांत क्षेत्र में संघर्ष के हालात बन सकते हैं. खासकर चीन ताइवान को कब्जे में लेने की कोशिश कर सकता है. इसलिए हमें पहले से तैयारी करनी होगी. ताइवान का भू-रणनीतिक रूप में काफी महत्व है. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन पहले ही चीनी आक्रमण की स्थिति में ताइवान की रक्षा करने का वचन दे चुके हैं. लेकिन हाल ही में ट्रम्प ने संकेत दिया था कि वह बाइडन के इस रुख का समर्थन नहीं करेंगे. उनका तर्क था कि ताइवान से अमेरिका को कोई बड़ा लाभ नहीं है.
चीन पर फोकस
नाटो की तमाम कोशिशों के बावजूद अमेरिका साथ नहीं होगा. लीक खुफिया रिपोर्ट ये भी बताती है कि अमेरिका अब सिर्फ चीन पर फोकस करना चाहता है. पिछले वर्ष हेरिटेज फाउंडेशन थिंक टैंक ने भी कुछ ऐसी ही रिपोर्ट दी थी. हालांकि, तब ट्रंप ने अपने चुनावी अभियान के दौरान इसका कोई जिक्र नहीं किया था. यह दस्तावेज बताता है कि किस तरह अमेरिका अपने टारगेट बदल रहा है. उसके सहयोगी बदल रहे हैं.
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