नई दिल्ली: एक समय था, जब दुनिया हमें सपेरों का देश कहती थी. पश्चिम हमें तिरस्कार की नजर से देखता था. हमें पश्चिम असभ्य बताता था. मगर आज वही पश्चिम भारत से सीख रहा है. सुपरपावर भारत को सलाम कर रहा है. जी हां, जो पश्चिम कभी भारत को गुलाम समझता था, आज उसे ही भारत के नक्शे कदम पर चलने पर मजबूर होना पड़ रहा है. अमेरिका को ग्रेट बनाने के लिए डोनाल्ड ट्रंप को भारत का सहारा लेना पड़ रहा है. डोनाल्ड ट्रंप भी मानते हैं कि अमेरिका को बेहतर बनाने के लिए भारत के मॉडल का होना बहुत जरूरी है. तभी तो डोनाल्ड ट्रंप ने जब अमेरिकी चुनाव प्रणाली में सुधार और बदलाव की बात की तो उन्होंने सबके सामने भारत का जिक्र किया. उन्होंने माना कि भारत में चुनाव प्रकिया की जो प्रणाली है वह दुनिया में सबसे बेहतर है.
अब जानते हैं कि ट्रंप अमेरिका में क्या करने जा रहे हैं. दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को आदर्श बताते हुए अमेरिकी चुनाव प्रणाली में की सुधार की बात की है. अमेरिकी चुनाव प्रणाली में बदलाव को लेकर ट्रंप ने एक आदेश जारी किया है. इसमें चुनाव संचालन के तरीके में बदलाव की बात कही गई है. इस आदेश में मतदाताओं से उनकी अमेरिकी नागरिकता को साबित करने और यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि चुनाव के दिन तक केवल मेल-इन या पोस्टल बैलेट मतपत्र ही गिने जाएं. इसके अलावा गैर-अमेरिकी नागरिकों को कुछ चुनावों में दान करने से भी रोकने का प्रस्ताव है.
भारत का जिक्र क्यों किया
डोनाल्ड ट्रंप ने इसके लिए भारत का जिक्र किया है. उन्होंने पूरी दुनिया के सामने भारत के चुनाव प्रथाओं का उदाहरण दिया. ट्रंप ने माना कि इस मामले में भारत अमेरिका से कोसों आगे है. उन्होंने तर्क दिया कि अमेरिका बुनियादी और आवश्यक चुनाव सुरक्षा को लागू करने में विफल रहा है, जो पहले से ही कई विकसित और विकासशील देशों में मानक बन चुके हैं. उन्होंने कहा, ‘भारत और ब्राजील मतदाता पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ रहे हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका नागरिकता के लिए काफी हद तक स्व-सत्यापन पर निर्भर है.’
ट्रंप को क्यों पड़ी जरूरत
अब सवाल है कि आखिर डोनाल्ड ट्रंप क्यों चाहते हैं बदलाव? इसकी वजह है 2020 का राष्ट्रपति चुनाव. जी हां, यह कार्यकारी आदेश ट्रंप के अमेरिकी चुनावों की अखंडता को बहाल करने के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है, जिनके बारे में वह अक्सर दावा करते आए हैं कि 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में कोई समझौता हुआ था. डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर भी जोर दिया कि ‘धोखाधड़ी, त्रुटियों या संदेह से अछूते स्वतंत्र, निष्पक्ष और ईमानदार चुनाव हमारे संवैधानिक गणराज्य को बनाए रखने के लिए जरूरी हैं. अमेरिकी नागरिकों का यह अधिकार कि उनके मतों की सही तरीके से गणना की जाए और उन्हें बिना किसी अवैध छेड़छाड़ के सारणीबद्ध किया जाए, चुनाव के वास्तविक विजेता का निर्धारण करने के लिए महत्वपूर्ण है.
भारत में चुनावी प्रक्रिया कितनी बेस्ट? भारत की चुनावी प्रक्रिया को दुनिया में सबसे बड़ी और जटिल लोकतांत्रिक प्रणाली माना जाता है. इसकी कुछ खास बातें इसे दुनिया में श्रेष्ठ बनाती हैं:
विस्तृत मतदाता आधार: भारत में लगभग 96 करोड़ मतदाता हैं, जो इसे दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र बनाता है.
ईवीएम और वीवीपैट तकनीक: चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और वीवीपैट का उपयोग पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करता है.
स्वतंत्र चुनाव आयोग: भारत का चुनाव आयोग स्वतंत्र रूप से चुनाव संचालन करता है, जिससे निष्पक्षता बनी रहती है.
कई चरणों में चुनाव: भारत में चुनाव विभिन्न राज्यों और चरणों में आयोजित होते हैं, जिससे सुचारू प्रबंधन होता है.
पारदर्शिता और लोकतांत्रिक व्यवस्था: इसकी वजह से भी भारत की चुनावी प्रक्रिया दुनिया में बेस्ट मानी जाती है.
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