नवमी 2025 विशेष: राम नवमी और मां सिद्धिदात्री का रहस्य-एक ही दिन दो पर्व क्यों?

0
3
नवमी 2025 विशेष: राम नवमी और मां सिद्धिदात्री का रहस्य-एक ही दिन दो पर्व क्यों?

Ram Navami 2025: सृष्टि की संचालिका कही जाने वाली आदिशक्ति की नौ कलाएं (विभूतियां) नवदुर्गा कहलाती हैं. नवदुर्गाओं में सबसे श्रेष्ठ और सिद्धि और मोक्ष देने वाली दुर्गा को सिद्धिदात्री कहा जाता है. इनकी पूजा चैत्र नवरात्रि के नौवें दिन की जाती है, इसी दिन श्रीराम का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है.

मां दुर्गा के इस अंतिम स्वरूप की अराधना के साथ ही नवरात्र के अनुष्ठान का समापन हो जाता है. राम नवमी और मां सिद्धिदात्री का पर्व महानवमी एक ही दिन मनाया जाता है क्या इसका कोई खास संबंध है, आइए जानते हैं.

मां सिद्धिदात्री और श्रीराम का पर्व एक ही दिन

भगवान राम का देवी और शक्ति से गहरा संबंध है. वासंतिक नवरात्रि में श्रीराम देवी की शक्ति लेकर प्रकट होते हैं और शारदीय नवरात्रि में शक्ति का प्रयोग करते हैं. चैत्र नवरात्रि की नवमी पर रामलला ने जन्म लिया था और इसी दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा होती है इसलिए ये दोनों पर्व एक दिन मनाए जाते हैं.

नवरात्रि और श्रीराम का खास संबंध

 एक तरफ नवमी तिथि को जन्म लेते हैं और दूसरी तरफ (अश्विन नवरात्रि) नवमी तिथि को शक्ति की पूजा करते हैं. राम नवमी जहां राम जी ने असुरी शक्तियों का नाश करने के लिए जन्म लिया था, वहीं इसी दिन मां दुर्गा ने असुरों पर विजय प्राप्त की थी.

ऐसा कहा जाता है कि रावण के साथ युद्ध करने से पहले श्री राम ने मां दुर्गा की पूजा की थी और इसके बाद ही श्री राम को विजय प्राप्त हुई थी. महानवमी पर राम जी ने मां सिद्धिदात्री की उपासना की थी और शारदीय नवरात्रि की नवमी के अगले दिन विजयादशमी पर भगवान राम ने रावण पर जीत हासिल की थी.

मां सिद्धिदात्री की पूजा का महत्व

देव, यक्ष, किन्नर, दानव, ऋषि-मुनि, साधक, विप्र और संसारी जन सिद्धिदात्री की पूजा नवरात्र के नौवें दिन करके अपनी जीवन में यश बल और धन की प्राप्ति करते हैं.

मां सिद्धिदात्री की पूजा

  • सुबह-सुबह स्थान करें और मन से शुद्ध रहते हुए मां के सामने बैठें.
  • उनके सामने दीपक जलाएं और उन्हें नौ कमल के फूल अर्पित.
  • फिर मां के मंत्र “ॐ ह्रीं दुर्गाय नमः” का यथाशक्ति जाप करें
  • अर्पित किये हुए कमल के फूल को लाल वस्त्र में लपेट कर रखें.
  • मान्यता है ऐसा करने से कष्टों और शत्रुओं का नाश होता है.

श्रीराम की पूजा

राम नवमी पर दोपहर 12 से 1 बजे के बीच भगवान राम की पूजा अर्चना करनी चाहिए.उन्हें पीले फल , पीले फूल और पंचामृत अर्पित करें. तुलसी दल भी जरूर अर्पित करें. श्री रामचरितमानस का पाठ करें या राम नाम जपें. जिन महिलाओं को संतान प्राप्ति में बाधा आ रही है उन्हें राम जी के बालस्वरूप की पूजा करनी चाहिए. हवन करें और फिर आरती करें.

Ram Navami 2025: राम नवमी पर 13 सालों बाद दुर्लभ संयोग, पूजा और खरीदारी का मिलेगा दोगुना लाभ

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. 

lifestyle, hindi lifestyle news, hindi news, hindi news today, latest hindi news, hindi news, hindi news today,

English News

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here