Fungal Infections : फंगल इंफेक्शन पर आई वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की पहली रिपोर्ट बेहद चौंकाने वाली है. 1 अप्रैल को आए इस नए रिपोर्ट में खतरनाक फंगल डिजीज के लिए दवाओं और टेस्ट करने वाली मशीनों की भारी कमी होने की बात कही गई है. रिपोर्ट में इनसे निपटने के लिए नए रिसर्च और डेवलपमेंट की तत्काल जरूरत बताई गई है. रिपोर्ट में कहा गया है कि फंगल बीमारियां तेजी से बढ़ रही है, जो चिंता का विषय हैं.
इनमें आम इंफेक्शन- जैसे कैंडिडा, जो मुंह और वैजाइनल थ्रस का कारण होता है, उसका इलाज ही कठिन होता जा रहा है. ये संक्रमण गंभीर रूप से बीमार मरीजों और कमजोर इम्यूनिटी वालों को सबसे ज्यादा प्रभावित करते हैं. इनमें कैंसर कीमोथेरेपी से गुजरने वाले मरीज, HIV पीड़ित और ऑर्गन ट्रांसप्लांट वाले लोग शामिल हैं.
खतरे में पड़ सकती है जिंदगी
रिपोर्ट में WHO के एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस के असिस्टेंट डायरेक्टर जनरल डॉ. युकिको नाकातानी के हवाले से कहा गया है कि आक्रामक फंगल संक्रमण सबसे कमजोर लोगों की जिंदगी को खतरे में डालते हैं, लेकिन कई देशों में इनसे बचने की सुविधाओं में कमी हैं. न सिर्फ नई एंटीफंगल दवाओं और जांच की कमी है, बल्कि लोअर और मीडियम इनकम वाले देशों के जिला अस्पतालों में भी फंगल टेस्ट में कमी है. जांच की इस कमी का मतलब है कि लोगों की समस्या का कारण पता ही नहीं चल पाता है, जिससे सही इलाज नहीं हो पाता है.
क्या है WHO की रिपोर्ट
WHO की फंगल प्रॉयरिटी वाली लिस्ट (FPPL) में सबसे अहम वो फंगस खतरनाक है, जिनकी मृत्यु दर 88% तक पहुंच जाती है. इलाज की कमी और जांच मशीनों के न होने, एंटीफंगल दवाओं की कमी और नए इलाज के लिए धीमी और कठिन प्रक्रिया से यह काफी चुनौती वाला बन गया है.
एंटीफंगल दवाओं पर डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट इस बात पर जोर डालती है कि पिछले दशक में, अमेरिका, यूरोपीय यूनियन या चीन में सिर्फ चार नई एंटीफंगल दवाओं को मंजूरी दी गई है. मौजूदा समय में 9 एंटीफंगल दवाएं सबसे ज्यादा खतरनाक फंगस के खिलाफ इस्तेमाल के लिए क्लिनिकल ट्रायल में हैं.
हालांकि सिर्फ तीन दवाएं तीसरे फेज में हैं, जो इसका लास्ट ट्रायल है. जिसका मतल है कि जल्द ही ये दवाएं आ सकती हैं. 22 दवाएं प्रीक्लिनिकल ट्रायल फेज में हैं, जो पहले के विकास चरणों से जुड़ी ड्रॉपआउट रेट, खतरों और चुनौतियों को देखते हुए अभी सही नहीं हैं.
फंगल इंफेक्शन कितना खतरनाक
फंगल इंफेक्शन आमतौर पर हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं. कुछ मामूली इंफेक्शन आसानी से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ खतरनाक और जानलेवा भी हो सकते हैं. हल्के फंगल इंफेक्शन में स्किन इंफेक्शन, मुंह या प्राइवेट पार्ट्स का इंफेक्शन हो सकता है. मीडियम लेवल पर फेफड़ों का इंफेक्शन, दमा, साइनसाइटिस हो सकता है. वहीं, खतरनाक और जानलेवा फंगल इंफेक्शन में ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस), इनवेसिव कैंडिडियासिस, क्रिप्टोकोकल मेनिन्जाइटिस, जो HIV-AIDS मरीजों में पाया जाता है, हो सकते हैं.
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