‘पत्नी को यातना दी तो भेज देंगे अंडमान जेल, किसी कोर्ट से नहीं मिलेगी बेल’, SC की चेतावनी

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‘पत्नी को यातना दी तो भेज देंगे अंडमान जेल, किसी कोर्ट से नहीं मिलेगी बेल’, SC की चेतावनी

<p style="text-align: justify;">पति-पत्नी को वापस साथ रहने के लिए मनाते हुए सुप्रीम कोर्ट के जज बिल्कुल परिवार के बड़े-बुज़ुर्ग की भूमिका में दिखे. मारपीट का आरोप लगा कर अलग रह रही पत्नी को जजों ने बच्चों की खातिर पति को दोबारा मौका देने के लिए मनाया. वहीं पति को चेतावनी देते हुए कहा कि अब अगर उसने पत्नी के साथ दुर्व्यवहार किया, तो उसे दूरदराज की जेल में बंद कर दिया जाएगा.<br /><br />जस्टिस सूर्य कांत और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने 23 जनवरी को पति को यह आदेश दिया था कि वह यूपी के महराजगंज में रह रही पत्नी को दिल्ली बुलाने के लिए 5000 रुपए किराया भेजे. जजों ने गुरुवार, 13 फरवरी को दोनों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट आने को कहा था. कोर्ट के आदेश के मुताबिक दोनों पेश हुए. जजों ने लगभग 20 मिनट तक उनसे बात की.<br /><br />पत्नी ने जजों से हिंदी में बात करते हुए कहा कि उसके पति ने पहले उसके साथ बुरा बर्ताव किया है. एक बार उसे जलाने की भी कोशिश की थी. वहीं पति ने कोर्ट को शपथ पत्र दिया कि वह अब बुरा व्यवहार नहीं करेगा. जजों ने महिला से कहा कि उसे अपने 14 साल और 6 साल के 2 बच्चों के भविष्य के बारे में सोचना चाहिए. वही पति से कहा कि अगर उसने अपने शपथ पत्र के मुताबिक आचरण नहीं किया, तो उसे अंडमान की जेल में भेज दिया जाएगा. साथ ही, यह आदेश भी दे दिया जाएगा कि देश की कोई भी कोर्ट उसे ज़मानत न दे.<br /><br />सुप्रीम कोर्ट ने 28 फरवरी को मामले की अगली सुनवाई तय करते हुए दिल्ली के पटेल नगर थाने के एसएचओ से कहा है कि वह 15 दिन तक हर शाम एक महिला कांस्टेबल को दंपति के घर भेजे. महिला कांस्टेबल हर दिन पत्नी से बयान ले कि उसके पति का बर्ताव कैसा है. यह डेली डायरी अगली सुनवाई में कोर्ट में पेश की जाए. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली स्टेट लीगल सर्विस ऑथोरिटी से भी कहा है कि वह अपनी एक महिला वॉलंटियर को दंपति के घर भेजे. वह वॉलंटियर भी रिपोर्ट दे कि दोनों राज़ी-खुशी रह रहे हैं या नहीं.<br /><br />सुप्रीम कोर्ट में यह मामला पिछले साल दाखिल हुआ था. यूपी के महराजगंज में रह रही पत्नी ने दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट में चल रहा घरेलू हिंसा का मुकदमा अपने शहर में ट्रांसफर करने की मांग की थी. मामले को सुनते हुए जजों को लगा कि पति-पत्नी में सुलह संभव है. ऐसे में उन्होंने केस को महराजगंज ट्रांसफर करने की बजाय दोनों को एक साथ रखने की कोशिश की है. पति को नसीहत देते हुए कहा कि जब कोई पुरुष विवाह करता है, तो अपनी पत्नी को सम्मान देना उसका दायित्व बन जाता है.</p>

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