2025 की नीट यूजी (राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश) परीक्षा के रिजल्ट को चुनौती देने वाली याचिका सुनने से सुप्रीम कोर्ट ने मना कर दिया है. एक छात्र ने कहा था कि परीक्षा में पूछे गए एक प्रश्न के एक से ज्यादा विकल्प सही थे. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि छात्र का दावा सही हो सकता है, लेकिन एक अखिल भारतीय परीक्षा के परिणाम में इस तरह दखल देना सही नहीं होगा.
याचिकाकर्ता शिवम गांधी रैना का कहना था कि उसके उत्तर को गलत मानने से रिजल्ट प्रभावित हुआ है. उसका ऑल इंडिया रैंक 6783 और जेनरल कैटेगरी रैंक 3195 है. अगर रिजल्ट को सुधारा गया तो उसे 5 अतिरिक्त अंक मिलेंगे. इससे उसकी रैंकिंग बहुत बेहतर हो जाएगी, लेकिन जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने इस पर विचार करने से मना कर दिया. जजों ने कहा कि अगर वह ऐसा आदेश देंगे तो इसका व्यापक परिणाम होगा. पूरे देश के छात्रों पर इसका असर पड़ेगा.
याचिकाकर्ता के लिए पेश वरिष्ठ वकील आर बालासुब्रमण्यम ने दलील दी कि 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने नीट यूजी के रिजल्ट में दखल दिया था. आईआईटी दिल्ली के विशेषज्ञों से कुछ प्रश्नों के सही उत्तर की जानकारी मांगी गई थी और उसके आधार पर रिजल्ट संशोधित करवाया गया था. इस पर जस्टिस नरसिम्हा ने कहा कि तब परीक्षा को लेकर बड़े पैमाने पर शिकायत सामने आई थी, लेकिन यहां मामला सिर्फ एक छात्र की शिकायत का है.
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