शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को जान से मारने की धमकी, जब सुनी तो आग बबूला हो गए, बोले- मार दो

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शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को जान से मारने की धमकी, जब सुनी तो आग बबूला हो गए, बोले- मार दो

Mahakumbh Stampede: महाकुंभ में मौनी अमावस्या पर हुई भगदड़ के बाद से शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद लगातार यूपी सरकार पर निशाना साधते रहे हैं. उनका आरोप है कि प्रशासन हकीकत छिपा रहा है, न यह बताया जा रहा है कि कितनी भगदड़ हुई और न यह बताया जा रहा है कि कितने लोग मारे गए. योगी सरकार की व्यवस्थाओं पर लगातार सवाल उठाने के बाद अब उन्होंने यह बताया है कि उन्हें जान से मारने की धमकी मिली है. शंकराचार्य ने यह भी कहा कि वह तो पहले ही अपना श्राद्ध तर्पण कर चुके हैं तो उन्हें मरने से कोई डर नहीं लगता.
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा हम अगर अपनी बात रखते हैं और सरकार को गलत लगती है तो उन्हें हमसे संवाद करना चाहिए. हमें तथ्य बताने चाहिए कि महाराज सच्चाई यह है. तब हमें अच्छा लगता कि चलों तथ्य दिखा रहे हैं, लेकिन वो तो ऐसा संवाद ही नहीं करते. शंकराचार्य कहते हैं, ‘उनके लोग बस धमकी देते रहे. जैसे अभी 4-5 लोगों ने फेसबुक पर लिखा कि तुमको जान से मार देंगे. मार दो मुझे. संन्यासी को मरने से क्या डर? जब अपना श्राद्ध तर्पण कर ही चुके हैं तो हमको क्या डर? हमें कौनसा संसार का सुख भोगना है?
शंकराचार्य कहते हैं, ‘जब तक भगवान ने रखा है तो यहां हैं, जिस दिन भगवान कह देगा कि चलो तो चल देंगे. मरने की धमकी उसको दो जो यह सोचता हो कि जिंदगी चली गई तो क्या होगा? हम तो हिंदू धर्म के मानने वाले हैं. संन्यासी होने के नाते हमें सांसारिक सुख भोगना ही नहीं है. हमें क्यों डराते हो? डराओ उसे, जिसके दर्शन में यह बात है कि अंतिम जिंदगी है, जो कुछ करना है कर लो.’
‘खुद की छवि बचा रहे बस’शंकराचार्य ने कहा, ‘अगर तथ्य की कोई बात है तो वह मुझे आकर बता सकते हैं. हम उसको स्वीकार करेंगे लेकिन आप लीपापोती करेंगे तो यह गलत है. लाशों को आप अगर कहेंगे कि अफवाह है, फिर लाशों के खेतों में दबवाने की अफवाह सुनी जाएगी, उनकी मार्च्यूरी में सड़ने की बात सुनी जाएगी. ये ठीक नहीं. ये कह रहे हैं कि 30 आदमी मरे और वहां जो लाशें रखी गई हैं सफेद कपड़े में बांध-बांधकर उनमें नंबर पड़े हुए हैं, 57…67 लिखा हुआ दिख रहा है. यह कैसे दिख रहा है? अगर लाशों के ऊपर आपने नंबरिंग की है तो बताओ यह है क्या? कुछ पत्रकारों ने छुपछुप कर फोटो खींच लिए तो हकीकत सामने आई. आप क्यों छिपा रहे हैं. आप हकीकत बताते कि ऐसा हो गया इतने लोग मर गए तो यह ज्यादा अच्छा होता. छिपाने से लगा कि यह बुजदिल आदमी हैं. ये हिम्मत वाला आदमी नहीं है. लोग भले ही कहें कि यह सख्त आदमी है, बुलडोजर चला देते हैं लेकिन मुझे लगता है डरे हुए हैं. घबराने वाले शख्स हैं कि मेरी इमेज खराब न हो जाए. घटना हो गई तो आप खड़े होकर संभालिए. इमेज क्यों खराब होगी?’
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