Rajasthan: सरकार सिखा रही रोबोटिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, छात्रों ने तैयार किए कमाल के गैजेट्स

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Rajasthan: सरकार सिखा रही रोबोटिक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, छात्रों ने तैयार किए कमाल के गैजेट्स

राजस्थान सरकार द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी और उन्नत तकनीक में युवाओं को सशक्त बनाने के लिए एक नई पहल के तहत विद्यार्थियों को मुफ्त में रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे लाखों रुपये के कोर्स कराए जा रहे हैं। डिपार्टमेंट ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और राजस्थान सेंटर ऑफ एडवांस्ड टेक्नोलॉजी के माध्यम से ऑटोफिना रोबोटिक्स सहित गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और रेड हैट जैसे बड़े ब्रांड्स के कोर्स विद्यार्थियों को बिना कोई शुल्क लिए उपलब्ध करवाए जा रहे हैं।

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इस पहल का परिणाम यह रहा है कि राजस्थान के युवाओं ने रोबोटिक्स और एआई में ऐसा कमाल कर दिखाया है, जो न केवल तकनीकी क्षेत्र में, बल्कि मेडिकल, डिफेंस और शिक्षा में भी क्रांति ला सकता है।

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स्कॉलरशिप से लाखों के कोर्स फ्री में किए

ऑटोफिना रोबोटिक्स में प्रशिक्षण ले रहे सत्यम पुरोहित ने बताया कि सरकार की इस पहल से हमें लाखों रुपये के कोर्स निशुल्क करने का अवसर मिला। हमने रोबोटिक्स में वह तकनीक सीखी है, जो भविष्य में बड़े बदलाव ला सकती है। हमारी टीम ने कई ऐसे गैजेट्स तैयार किए हैं, जो रोजगार और स्टार्टअप के नए अवसर खोल रहे हैं।

गेश्चर पाम: दूर बैठे सर्जन कर सकेंगे ऑपरेशन

सत्यम, अरविंद और अजय ने मिलकर ‘गेश्चर पाम’ नामक एक अनोखा गैजेट तैयार किया है। इस डिवाइस की खासियत यह है कि इसके जरिए कोई भी सर्जन दूर बैठे ही सर्जरी कर सकता है। यह खासतौर से ग्रामीण और दुर्गम इलाकों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है। सर्जन बिना मौके पर पहुंचे ही इस तकनीक से रोबोट की सहायता से जटिल ऑपरेशन कर सकेंगे।

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गेश्चर पाम: जहां इंसान न पहुंचे वहां पहुंचेगी यह कार

इसी टीम ने एक और शानदार गैजेट ‘गेश्चर कार’ भी बनाई है। सत्यम बताते हैं, यह कार उन जगहों पर भी पहुंच सकती है जहां इंसान का जाना मुश्किल होता है। इस कार को हमने (वर्चुअल रियलिटी) टेक्नोलॉजी और मोबाइल मूवमेंट से कनेक्ट किया है। जैसे-जैसे मोबाइल हिलेगा, वैसे ही कार भी मूव करेगी। यह तकनीक आपदा प्रबंधन, सैन्य कार्यों और खनन क्षेत्रों में बेहद उपयोगी हो सकती है।

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जिज्ञासा ह्यूमैनॉयड रोबोट: इंसानों की तरह बोलेगा और पहचानेगा

छात्रों ने एक AI आधारित ह्यूमैनॉयड रोबोट भी तैयार किया है, जिसका नाम ‘जिज्ञासा’ रखा गया है। यह रोबोट न सिर्फ इंसानों को ट्रैक करता है बल्कि चेहरे भी पहचान सकता है। इतना ही नहीं, यह रोबोट इंटरनेट से जुड़े सवालों के जवाब भी दे सकता है। वर्तमान में यह प्रोटोटाइप है और जल्द ही इसे पूर्ण रूप से विकसित किया जाएगा।

3D पेन और डॉग रोबोट: कम लागत में बड़ी तकनीक

टीम ने 3D पेन भी तैयार किया है, जो कम लागत में शब्दों और आकृतियों को 3D में बना सकता है। साथ ही एक डॉग रोबोट भी बनाया है, जो खास तौर पर बच्चों और रोबोटिक्स में शुरुआती सीखने वालों के लिए बेहद आकर्षक और उपयोगी है।

सात संभागों में चल रहे सेंटर, स्टार्टअप्स की शुरुआत भी

छात्र अरविंद और अजय ने बताया कि फिलहाल राजस्थान के सात संभागों में ये रोबोटिक्स और AI के सेंटर संचालित हो रहे हैं। हमने भी अपने खुद के स्टार्टअप की शुरुआत कर दी है। जल्द ही कई बड़ी कंपनियां भी हमें नौकरी और परियोजनाओं के प्रस्ताव दे रही हैं। राजस्थान सरकार की इस योजना ने न केवल छात्रों को तकनीकी रूप से मजबूत किया है बल्कि उन्हें भविष्य में रोजगार, स्टार्टअप और नवाचार के लिए भी तैयार कर दिया है।

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