याचिकाकर्ताओं की अपील न्यायमूर्ति सुरेश्वर ठाकुर और न्यायमूर्ति विकास सूरी की खंडपीठ ने अधिवक्ता दिनेश कुमार मल्होत्रा और सक्षम मल्होत्रा के माध्यम से मंदिर के देवता भगवान शिव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि त्योहार के दौरान द्वारों को बंद करने से भक्तों की अपेक्षित बड़ी भीड़ के कारण भगदड़ मच सकती है। चंडीगढ़ प्रशासन ने दिया ये तर्क चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से अतिरिक्त स्थायी वकील पीएस कंवर और स्थायी वकील दीपक मल्होत्रा ने अदालत को बताया कि सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत बेदखली आदेश के अनुपालन में मंदिर परिसर को अपने कब्जे में ले लिया गया है। यह भी पढ़ें Mahashivratri 2025: शिवरात्रि पर खुलेगा पाकिस्तान का बॉर्डर, भारत के 154 हिंदू करेंगे इस अनूठे मंदिर के दर्शन हाईकोट कोर्ट ने सुनाया ये फैसला कोर्ट ने कहा कि बेदखली आदेश की वैधता या मंदिर समिति के अधिकार पर विचार किये बिना शिवरात्रि और लंगर सेवा के लिए मंदिर के कपाट खोल जाए। कोर्ट ने आदेश में कहा कि आगामी महा शिवरात्रि महोत्सव 26.02.2025 (बुधवार) को आयोजित किया जाना है और 02.03.2025 (रविवार) को मंदिर परिसर में ‘लंगर सेवा’ भी आयोजित की जानी है। इस दौरान मंदिर स्थल पर किसी भी भगदड़ को रोका जा सके, इसलिए मंदिर के मुख्य कपाट खोले जाए। क्योंकि मंदिर की ओर जाने वाले द्वारों की चौड़ाई कम पड़ सकती है, जबकि मुख्य मंदिर के द्वार की चौड़ाई मंदिर के अंदर भक्तों के सुचारू प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त है। पुलिस संभालेंगी भीड़ अदालत ने आदेश दिया कि 25 फरवरी से 2 मार्च तक पुलिस की मदद से मंदिर में भीड़ कंट्रोल की जाएगी। इसके बाद दो मार्च की शाम को मुख्य मंदिर के द्वार बंद कर दिए जाएंगे।
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