CM Yogi Slams MK Stalin: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश को भाषा के आधार पर नहीं बांटा जाना चाहिए. तीन-भाषा विवाद को लेकर सीएम योगी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन पर निशाना साधते हुए कहा कि तमिल भारत की सबसे पुरानी भाषाओं में से एक है और इसका इतिहास संस्कृत जितना ही पुराना है. तमिल के प्रति हर भारतीय का आदर और सम्मान है क्योंकि इस भाषा में भारतीय विरासत के कई तत्व आज भी जीवित हैं तो फिर हमें हिंदी से नफरत क्यों करनी चाहिए?
एएनआई पॉडकास्ट में सीएम योगी बोले, “मेरा मानना है कि हमारे राष्ट्रगान से भी यही संदेश मिलता है. यह केवल संकीर्ण राजनीति है. जब इन लोगों को लगता है कि उनका वोट बैंक खतरे में है तो वे क्षेत्र और भाषा के आधार पर विभाजन पैदा करने की कोशिश करते हैं. इस देश के लोगों को ऐसी विभाजनकारी राजनीति से हमेशा सावधान रहना चाहिए और देश की एकता के लिए दृढ़ रहना चाहिए.”
उत्तर प्रदेश में पढ़ाई जाती है तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम
सीएम योगी ने आगे कहा, “मैं कहता हूं कि हमें हर भाषा सीखनी चाहिए. हम उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम पढ़ाते हैं. हम न केवल इन्हें पढ़ा रहे हैं, बल्कि हम उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में विदेशी भाषाएं भी पढ़ा रहे हैं. यह सब राष्ट्रीय शिक्षा नीति में लागू किया गया है. अगर हम उत्तर प्रदेश के विश्वविद्यालयों में तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़, मराठी और अन्य भाषाएं पढ़ा सकते हैं तो तमिलनाडु के विश्वविद्यालयों में हिंदी पढ़ाने में क्या बुराई है? मेरा मानना है कि हमें देश के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए.”
‘बैठक की आड़ में स्टालिन का यह राजनीतिक एजेंडा’
यूपी सीएम बोले, “देखिए, गृह मंत्री ने इस मामले पर बहुत स्पष्ट रूप से कहा है. बैठक की आड़ में स्टालिन का यह राजनीतिक एजेंडा है. मेरा मानना है कि गृह मंत्री के बयान के बाद इस मुद्दे पर कोई सवाल नहीं उठना चाहिए.”
सीएम योगी ने क्यों दिया बांग्लादेश का उदाहरण?
यही नहीं सीएम योगी ने कहा, “सौ हिंदू परिवारों के बीच एक मुस्लिम परिवार सबसे सुरक्षित है. उन्हें अपने सभी धार्मिक कार्यों का पालन करने की स्वतंत्रता होगी, लेकिन क्या 100 मुस्लिम परिवारों के बीच 50 हिंदू सुरक्षित रह सकते हैं? नहीं… बांग्लादेश इसका उदाहरण है. इससे पहले पाकिस्तान इसका उदाहरण था.”
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