<p style="text-align: justify;">दिल्ली की एंटी करप्शन ब्रांच (ACB) ने एक बड़े फर्जी फॉर्मेसी रजिस्ट्रेशन घोटाले का खुलासा किया है. इस घोटाले में कई फर्जी फॉर्मासिस्ट और केमिस्ट पकड़े गए हैं, जो नकली दस्तावेजों के आधार पर रजिस्ट्रेशन करवाकर दवाइयों की दुकान चला रहे थे.</p>
<p style="text-align: justify;">दरअसल, 30 जनवरी 2024 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग दिल्ली सरकार की तरफ से शिकायत दर्ज कराई गई कि दिल्ली फार्मेसी काउंसिल के तत्कालीन रजिस्ट्रार कुलदीप सिंह ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तीन उम्मीदवारों को फार्मासिस्ट के रूप में रजिस्टर कर दिया है. मामले की जांच ACB को दी गई. 23 अप्रैल 2024 को ACB को इसकी जांच की अनुमति मिल गई. इसके बाद मामला दर्ज किया गया और कार्रवाई शुरू हुई.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>अब तक 35 फर्जी फॉर्मासिस्ट/केमिस्ट गिरफ्तार</strong></p>
<p style="text-align: justify;">ACB की जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी कुलदीप सिंह ने (17 मार्च 2020 से 25 सितंबर 2023) के बीच कुल 4,928 फार्मासिस्टों के रजिस्ट्रेशन को मंजूरी दी थी. अभी तक 35 फर्जी फार्मासिस्ट/केमिस्ट की गिरफ्तारी हो चुकी है और बाकी रजिस्ट्रेशनों की जांच जारी है. फार्मासिस्टों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन 21 जुलाई 2020 से एक निजी कंपनी VMC के जरिए शुरू किया गया लेकिन ये प्रक्रिया बिना किसी टेंडर के और नियमों का उल्लंघन कर की गई.</p>
<p style="text-align: justify;">आवेदकों ने नकली डिप्लोमा और ट्रेनिंग सर्टिफिकेट ऑनलाइन अपलोड किए, जिनकी फर्जी पुष्टि फार्मेसी कॉलेजों के कर्मचारियों ने ई-मेल के जरिए की. इस घोटाले में संजय नाम के एक मुख्य दलाल ने फार्मेसी काउंसिल और डिप्लोमा कॉलेजों के बीच बिचौलिये की भूमिका निभाई और रिश्वत के लेन-देन में शामिल रहा.</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>’कंप्यूटर सिस्टम की जांच में कई फर्जी प्रमाण पत्र मिले'</strong><br />कई आवेदकों ने अलग-अलग दस्तावेजों के जरिए कई बार आवेदन किया फिर भी उनके रजिस्ट्रेशन को बिना किसी आपत्ति के मंजूरी दे दी गई. नकली ई-मेल आईडी से फर्जी वेरिफिकेशन मेल भेजे गए ताकि जाली प्रमाण पत्रों को वैध दिखाया जा सके. कुलदीप सिंह ने 16 अगस्त 2023 को पद छोड़ने के बाद भी अपने निजी ई-मेल से 232 और लोगों का रजिस्ट्रेशन अप्रूव किया. नीरज नाम के व्यक्ति ने दिल्ली के शाहबाद इलाके से नकली दस्तावेज प्रिंट करने का काम किया. उसकी कंप्यूटर सिस्टम की जांच में कई फर्जी प्रमाण पत्र मिलने की पुष्टि हुई.</p>
<p style="text-align: justify;">ACB ने फर्जी ट्रेनिंग सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, कंप्यूटर सिस्टम और प्रिंटर जब्त किए हैं. कई फार्मासिस्ट और केमिस्ट बिना किसी योग्यता के दिल्ली में दवा की दुकान चला रहे थे, कुछ तो 10वीं पास भी नहीं थे. इस पूरे मामले में अब तक 47 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, जिनमें पूर्व रजिस्ट्रार कुलदीप सिंह, क्लर्क, 6 दलाल, 1 प्रिंटिंग शॉप मालिक, 3 फार्मेसी कॉलेजों के कर्मचारी, 35 फर्जी फार्मासिस्ट/केमिस्ट शामिल हैं. ACB इस पूरे घोटाले की गहराई से जांच कर रही है. इस बात की भी जांच हो रही है कि और कितने फर्जी फार्मासिस्ट दिल्ली में बिना योग्यता के काम कर रहे हैं.</p>
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