3 अंक में समझें पूरा गणित

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3 अंक में समझें पूरा गणित

भारत में अभी रेपो रेट 6.5 प्रतिशत है। हाल ही में अमेरिका के फेड रिजर्व ने रिजर्व बैंक में बदलाव किया था, जिसके बाद भारत में भी रिजर्व बैंक की उम्मीद कम हो गई थी। हालाँकि ऐसा नहीं हुआ।

द्वारा अरविन्द दुबे

प्रकाशित तिथि: बुध, 09 अक्टूबर 2024 10:52:32 पूर्वाह्न (IST)

अद्यतन दिनांक: बुध, 09 अक्टूबर 2024 01:55:01 अपराह्न (IST)

गवर्नर गवर्नर शक्ति कांत दास (फोटो)

पर प्रकाश डाला गया

  1. लगातार 10वीं बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं
  2. अगली बैठक तक फ्रेंचाइजी 6.5 प्रतिशत पर
  3. अभी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का सारा जोर बैलेंस शीट पर

एजेंसी, नई दिल्ली (आरबीआई एमपीसी मीट)। आदर्श नीति की समीक्षा बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव का निर्णय नहीं लिया गया। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्ति कांत दास ने बैठक के बाद रविवार को बताया कि रेपो रेट 6.5 फीसदी रहेगा।

रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने का मतलब यह है कि आम आदमी पर आम आदमी का बोझ नहीं रहता। हालाँकि किसी भी तरह की राहत किसी भी तरह से नहीं मिली है।

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने प्रमुख ब्याज दरों का उद्घाटन किया है।

शक्तिकांत दास ने घोषणा की कि छह विहारी आश्रम छात्रावास नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार को समाप्त हो गई है।

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रिपेरो स्थिर स्थिर भंडार के तीन बड़े कारण, मूल में संग्रह

  • पहला: रिज़र्व बैंक का फोकस अभी भी सांख्यिकी में रखा गया है। अगस्त में रिटेल आउटलेट दर मार्जिनल रूप से 3.65 प्रतिशत था। खाद्य श्रमिक भी एक चिंता का विषय है, जिसमें आलू, टमाटर और टमाटर के स्वाद वाले खाद्य पदार्थ शामिल हैं।
  • दूसरा: इजरायल और ईरान संघर्ष पर भी आरबीआई की नजर है। यदि देश की खाड़ी में स्थिति और खनिज संपदा है और कच्चे तेल के कारखाने या प्लांट बाधित हैं, तो भारत में भी इसका असर देखने को मिलेगा। इससे भी अधिक वर्गीकरण।
  • तीसरा: अमेरिका में सेंट्रल बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज ब्याज में आधे प्रतिशत की कटौती के बाद ब्याज में कमी आई है। ये निवेशक भारत का रुख कर सकते हैं। यहां कैश फ़्लो को बढ़ाया जा सकता है, फिर भी स्थिरता पर प्रभावशाली प्रभाव डाला जा सकता है।

लंबे समय से नहीं हुआ बदलाव

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की सचिवालय वाली छात्रावास नीति समिति (एमपीसी) ने लंबे समय से जारी रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। रेपो रेट में पिछली बार फरवरी 2023 में बदलाव किया गया था, तब से यह 6.50 फीसदी पर स्थिर है।

आम जनता के होम लोन, पर्सनल, ऑटो लोन और अन्य लोन के ब्याज पर रेट लोन के खाते से ही तय होता है। यदि आरबीआई रिजर्वो की रेटिंग बढ़ी है, तो बैंक में भी बढ़ोतरी दी जाती है।

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