कल खुश था, मगर आज क्यों गिर रहा फार्मा सेक्टर? 6-6 फीसदी तक लुढ़के स्टॉक, ले डूबी ट्रंप की एक बात

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कल खुश था, मगर आज क्यों गिर रहा फार्मा सेक्टर? 6-6 फीसदी तक लुढ़के स्टॉक, ले डूबी ट्रंप की एक बात

3 अप्रैल को चहक रहे भारतीय दवा कंपनियों के शेयर के लिए अगला ही दिन ‘ब्लैक फ्राइडे’ साबित हुआ. औरोबिंदो फार्मा, आईपीसीए लैबोरेटरीज, ल्यूपिन जैसी फार्मा कंपनियों के शेयर 5 फीसदी तक लुढ़क गए. 2 अप्रैल की रात को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 26 फीसदी टैरिफ का ऐलान किया, लेकिन फार्मा कंपनियों को टैरिफ की कड़वी दवा से दूर रखा. इसी वजह से 3 अप्रैल को जब भारतीय शेयर बाजार खुले तो पूरा बाजार लाल, मगर फार्मा कंपनियां बढ़िया प्रदर्शन करती दिखीं. एक दिन बाद ट्रंप ने कहा कि फार्मा सेक्टर पर भी भारी टैरिफ लगाएंगे. इतना भारी कि आज तक देखा नहीं गया होगा. ट्रंप का इतना ही कहना था कि शेयर बाजार में पूरा फार्मा सेक्टर गिर गया. लगभग 10:50 बजे तक निफ्टी फार्मा इंडेक्स में लगभग 5 फीसदी तक की गिरावट देखने को मिली.

इस सीन के इस उदाहरण से समझिए. मान लें कि आप एक दुकानदार हैं और विदेश से सस्ता सामान मंगाते हैं, लेकिन अचानक सरकार कहे कि अब उस सामान पर मोटा टैक्स लगेगा. आपकी लागत बढ़ेगी, मुनाफा घटेगा. यही हाल अब फार्मा कंपनियों का होने वाला है. इसी खौफ में फार्मा सेक्टर के शेयर गिर रहे हैं.

शुक्रवार को ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए फार्मा कंपनियों पर बम फोड़ा. उन्होंने कहा, “फार्मा टैरिफ इतने बड़े होंगे कि आपने पहले कभी नहीं देखे. हम इसे अलग कैटेगरी में देख रहे हैं. जल्द ही इसकी घोषणा होगी, ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ेगा. अभी इसकी समीक्षा चल रही है.”

क्या सस्ती दवाएं अमेरिका के लिए खतरा?यह सब कोई अचानक नहीं हुआ. पहले भी संकेत मिले थे कि फार्मा पर टैरिफ की तलवार लटक रही है. 2 अप्रैल को रोज गार्डन में हुए कार्यक्रम में इसकी चर्चा नहीं हुई थी, लेकिन अब साफ हो गया कि यह छूट सिर्फ अस्थायी थी. ट्रंप प्रशासन अब फार्मा और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों की पड़ताल में जुटा है. इसके लिए वे 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 का सहारा ले रहे हैं. यह धारा अमेरिकी सरकार को यह अधिकार देती है कि अगर कोई आयातित सामान राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बनता है, तो उस पर रोक सकता है या टैक्स लगा सकता है. यानी, ट्रंप का मानना है कि भारत से आने वाली सस्ती दवाएं अमेरिका के लिए जोखिम हैं.

क्या पूरा बोझ पड़ेगा ग्राहक पर?अब सवाल यह है कि टैरिफ लगने से क्या होगा? ब्रोकरेज फर्म ‘सिटी’ का कहना है कि फार्मा कंपनियां इस बढ़ी हुई लागत को बीमा कंपनियों या ग्राहकों पर डालने की कोशिश करेंगी. लेकिन अगर मरीजों तक यह बोझ नहीं पहुंचा, तो सप्लाई चेन (दवा बनाने से लेकर बेचने तक का पूरा नेटवर्क) को नुकसान उठाना पड़ेगा. सिटी का यह भी मानना है कि पूरा टैरिफ ग्राहकों पर डालना आसान नहीं होगा. वहीं, जेफरीज का कहना है कि भारत अमेरिका से करीब 6,400 करोड़ रुपये ($800 मिलियन) की दवाएं आयात करता है, जबकि अमेरिका को 69,600 करोड़ रुपये ($8.7 बिलियन) की दवाएं निर्यात करता है. अगर भारत अमेरिका से आने वाली दवाओं पर आयात शुल्क हटा दे, तो कुछ राहत मिल सकती है.

आने वाले दिनों में ट्रंप की घोषणा से पता चलेगा कि यह टैरिफ कितना बड़ा होगा और भारतीय फार्मा उद्योग का भविष्य क्या होगा, मगर इस खबर का असर शेयर बाजार पर साफ दिखा. औरोबिंदो फार्मा के शेयर 6% टूट गए, जबकि IPCA लैब्स, ल्यूपिन, बायोकॉन जैसी कंपनियों के शेयर 4 फीसदी से 5 फीसदी तक गिरे.

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