भारत के सबसे बड़े स्मॉल-कैप फंड मैनेजर ने चेतावनी दी है कि मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयर अभी भी काफी ओवरवैल्यूड हैं और उनमें गिरावट जारी रह सकती है. निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड के मुख्य निवेश अधिकारी (CIO) शैलेश राज भान ने मनीकंट्रोल को दिए एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कहा, “मिड और स्मॉल-कैप सेगमेंट के दो-तिहाई शेयर अभी भी महंगे हैं, और इनमें करेक्शन की प्रक्रिया खत्म नहीं हुई है.” यदि शैलेश राज भान की बात सही है तो आने वाले दिनों में मिड और स्मॉल कैप शेयरों में और भी गिरावट देखने को मिलेगी.
पिछले कुछ महीनों में बाजार में तेजी दिखी, लेकिन यह रैली लार्ज-कैप शेयरों तक सीमित रही. अक्टूबर से दिसंबर के बीच FIIs (विदेशी संस्थागत निवेशकों) की बिकवाली और कमजोर कमाई ने लार्ज-कैप शेयरों को नीचे खींचा. वहीं, मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में गिरावट का कारण अत्यधिक वैल्यूएशन और निराशाजनक नतीजे रहे. भान के मुताबिक, “पिछले साल इस सेगमेंट में बिना किसी वजह के पैसा डाला गया, नतीजतन शेयर बुलबुले की तरह फूल गए. फिर जब कंपनियों के नतीजे खराब आए तो इन शेयरों में गिरावट शुरू हुई. यह पैनिक सेलिंग नहीं थी, जैसा कि लार्ज-कैप में FIIs की बिकवाली के दौरान देखा गया था.”
हालांकि, मिड-कैप शेयरों में से लगभग 30-40 फीसदी अब उचित कीमत पर हैं, और लार्ज-कैप्स में भी करेक्शन हो चुका है. लेकिन स्मॉल-कैप शेयर अभी भी ओवरवैल्यूड हैं. इसी वजह से स्मॉल कैप से थोड़ा बचकर रहना होगा. भान ने बताया कि म्यूचुअल फंड्स में निवेश अभी भी स्थिर है और रिडेम्पशन प्रेशर नहीं है. इसलिए, शेयरों की कीमतों में सुधार धीरे-धीरे होगा, न कि एकदम से.
एकरिंग बायस से बचने की सलाहभान ने निवेशकों को “एंकरिंग बायस” से बचने की सलाह दी. एकरिंग बायस यह एक मनोवैज्ञानिक प्रभाव है, जहां निवेशक पुरानी ऊंची कीमतों को आधार मानकर शेयर खरीद लेते हैं, भले ही वे अब ओवरप्राइस्ड हों. उन्होंने चेतावनी दी कि “कुछ कंपनियां जिनका तिमाही ऑपरेटिंग प्रॉफिट सिर्फ 20 करोड़ रुपये है, उनकी मार्केट कैप (बाजार पूंजी) 10,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी. अगर ये कंपनियां मजबूत नहीं हैं, तो उनकी मार्केट कैप 50-70 फीसदी तक गिर सकती है.” उन्होंने आगाह किया कि IPO भी एक बुलबुला है, जिसमें सावधानी बरतनी चाहिए.”
भान ने माइक्रो-कैप शेयरों पर भी सख्त टिप्पणी की. उनके अनुसार, “जिन स्मॉल-कैप शेयरों में संस्थागत निवेशकों (म्यूचुअल फंड्स, बीमा कंपनियां) की दिलचस्पी नहीं है, उनमें सबसे ज्यादा गिरावट (70 फीसदी तक) देखी गई है.” उन्होंने कहा कि “जिन निवेशकों ने खुद सीधे शेयर खरीदे हैं, उनके पोर्टफोलियो म्यूचुअल फंड्स की तुलना में ज्यादा प्रभावित हुए हैं, खासकर उन शेयरों में जिनकी बुनियाद कमजोर थी.”
(Disclaimer: यहां बताए गए स्टॉक्स ब्रोकरेज हाउसेज / फंड मैनेजर की सलाह पर आधारित हैं. यदि आप इनमें से किसी में भी पैसा लगाना चाहते हैं तो पहले सर्टिफाइड इनवेस्टमेंट एडवायजर से परामर्श कर लें. आपके किसी भी तरह के लाभ या हानि के लिए News18 जिम्मेदार नहीं होगा.)
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