टाइम निकलने के बाद क्‍या कब्‍जा लेने के लिए बाध्‍य है घर खरीदार? जानिए

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टाइम निकलने के बाद क्‍या कब्‍जा लेने के लिए बाध्‍य है घर खरीदार? जानिए

नई दिल्‍ली. दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक महत्‍वपूर्ण फैसला देते हुए कहा है कि खरीदार बिल्डर की अनुचित देरी के बाद प्रॉपर्टी का कब्जा लेने के लिए बाध्य नहीं है. आयोग की अध्यक्ष जस्टिस संगीता ढींगरा सहगल और सदस्य सुश्री पिंकी की खंडपीठ ने रहेजा डेवलपर्स को सेवा में कमी का दोषी ठहराया और उसे शिकायतकर्ता को 6% ब्याज के साथ उसके द्वारा भूखंड के लिए चुकाए पूरे पैसे वापस करने का आदेश दिया. साथ ही मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा और मुकदमेबाजी की लागत के रूप में 50,000 रुपये भी रहेजा डेवलपर्स को शिकायतकर्ता को देने होंगे.

शिकायतकर्ता ने रहेजा डेवलपर्स की परियोजना “रहेजा अरण्य सिटी” में एक आवासीय भूखंड बुक किया था. डेवलपर और शिकायतकर्ता के बीच हुए समझौते के अनुसार, डेवलपर ने 36 महीनों के भीतर भूखंड का कब्जा सौंपने का वादा किया था. हालांकि, बड़ी रकम चुकाने के बावजूद भी डेवलपर्स समय पर उस भूखंड पर फ्लैट नहीं बना पाया. शिकायतकर्ता ने कब्जा न मिलने और पैसे की वापसी के लिए डेवलपर को कई ईमेल और लीगल नोटिस भेजे, लेकिन उचित जवाब नहीं मिला.

उपभोक्‍ता आयोग पहुंचा खरीदार रहेजा डेवलेपर्स से कोई जवाब नहीं मिलने पर उपभोक्‍ता ने दिल्ली राज्य उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया. रहेजा डेवलपर्स ने तर्क दिया कि शिकायतकर्ता उपभोक्ता नहीं है, क्योंकि भूखंड वाणिज्यिक लाभ के लिए खरीदा गया था. उन्होंने यह भी दावा किया कि शिकायत समय सीमा से बाहर है और भूखंड विकास में देरी उनके नियंत्रण से बाहर के कारकों की वजह से हुई.

आयोग का फैसलाआयोग ने डेवलपर के तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत एक उपभोक्ता है. डेवलपर यह साबित करने में विफल रहा कि भूखंड वाणिज्यिक उद्देश्यों के लिए खरीदा गया था. आयोग ने कहा कि कब्जे में देरी और वादे के अनुसार सेवाएं देने में विफलता सेवा में कमी का स्पष्ट उदाहरण है. आयोग ने निर्देश दिया कि रहेजा डेवलपर्स शिकायतकर्ता को 6% ब्याज के साथ 1,10,22,326 रुपये की चुकाई गई राशि लौटाए.

इसके अलावा, आयोग ने मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 5 लाख रुपये का मुआवजा और मुकदमेबाजी की लागत के रूप में 50,000 रुपये देने का आदेश दिया. आयोग ने स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता को अनुचित देरी के बाद कब्जा स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता.
Tags: Consumer Court, Property disputeFIRST PUBLISHED : January 6, 2025, 21:08 IST

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