Last Updated:March 26, 2025, 15:19 ISTबैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा कर्ज देने के नियम कड़े होने से 30 लाख लोग लोन नहीं ले पा रहे हैं. माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में एनपीए 13% तक पहुंच गया है.बैंकों ने कर्ज को बट्टे खाते में डाल डिफाल्टरों को लोन देना बंद कर दिया है. हाइलाइट्स30 लाख लोग सख्त कर्ज नियमों से लोन से वंचित.माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में एनपीए 13% तक पहुंचा.साहूकारों से ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेने को मजबूर.नई दिल्ली. बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा कर्ज देने के नियम कड़े करने और पुराने डिफॉल्टरों को लोन न देन की वजह से पिछले नौ महीनों में करीब 30 लाख लोगों को लोन नहीं मिल रहा है. ये लोग बैंकों और वित्तीय संस्थानों का कर्ज नहीं चुका पाए. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, बैंकों ने इनके लोन को बट्टे खाते में डालकर अपने बही-खाते साफ कर लिए और साथ ही इन लोगों के लिए भविष्य में लोन लेने का रास्ता भी बंद कर दिया. जो लोग बैंक लोन सुविधा से वंचित किए गए हैं, वे ज्यादातर गरीब हैं. हालांकि, कुछ नए ग्राहक हर साल कर्ज प्रणाली में जुड़ते हैं, लेकिन अगर मौजूदा सख्त नियम जारी रहे तो आने वाले महीनों में और ज्यादा लोग औपचारिक कर्ज प्रणाली से बाहर हो सकते हैं.
माइक्रोफाइनेंस सेक्टर के जानकारों का कहना है कि 60 दिनों से ज्यादा समय से बकाया राशि वाले और ₹3,000 से अधिक कर्ज वाले ग्राहकों को नए कर्ज नहीं दिए जा रहे हैं. माइक्रोफाइनेंस सेक्टर की स्व-नियामकीय संस्था सा-धन (Sa-Dhan) के कार्यकारी निदेशक जीजी मम्मन का कहना है कि जिन लोगों ने समय पर कर्ज नहीं चुकाया, उन्हें दोबारा लोन नहीं दिया जा रहा है.
कर्ज लेने वालों की संख्या घटीदिसंबर 2024 तक माइक्रोफाइनेंस कंपनियों, छोटे बैंकों और एनबीएफसी से कर्ज लेने वालों की संख्या 8.4 करोड़ थी, जबकि वित्त वर्ष 2025 की शुरुआत में यह आंकड़ा 8.7 करोड़ था. ऋण वसूली में गिरावट का प्रभाव मुख्यधारा के ऋणदाताओं की आय में दिखाई दे रहा है और इससे बैंकों और वित्तीय संस्थानों को हो रहा नुकसान हो रहा है.
इंडसइंड बैंक को माइक्रोफाइनेंस लोन में बढ़ते डिफॉल्ट की वजह से भारी नुकसान हुआ और इसका तीसरी तिमाही का मुनाफा 40% गिर गया. बंधन बैंक ने ₹1,266 करोड़ के कर्ज को बट्टे खाते में डाल दिया, यानी इस कर्ज की वसूली की उम्मीद छोड़ दी गई है. वित्तीय जानकारों का कहना है कि चौथी तिमाही में और भी ज्यादा कर्ज को बट्टे खाते में डाला जा सकता है, जिससे और लोग औपचारिक ऋण प्रणाली से बाहर हो सकते हैं.
एनपीए में उछालदिसंबर 2024 तक माइक्रोफाइनेंस सेक्टर में खराब कर्ज (NPA) का स्तर 13% तक पहुंच गया. 180 दिनों से ज्यादा समय तक न चुकाए गए माइक्रो लोन की दर 11% हो गई, जो एक साल पहले 9% थी. जो लोग बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज नहीं ले पा रहे हैं, वे अब साहूकारों से ऊंची ब्याज दर पर कर्ज लेने को मजबूर हैं.
मुथूट माइक्रोफिन के सीईओ सादफ सईद ने कहा, “जो लोग औपचारिक वित्तीय प्रणाली से बाहर हो रहे हैं, वे अब महंगे ब्याज पर साहूकारों से कर्ज लेंगे, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति और खराब हो सकती है.” वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को अवैध कर्जदाताओं पर सख्त कार्रवाई करनी होगी. इसके लिए ‘बैनिंग ऑफ अनरेगुलेटेड लेंडिंग एक्टिविटीज (BULA) बिल’ को जल्द से जल्द लागू करने की जरूरत है.
Location :New Delhi,New Delhi,DelhiFirst Published :March 26, 2025, 15:19 ISThomebusiness30 लाख लोगों को नहीं मिलेगा लोन, कहीं आपका नाम तो नहीं इस लिस्ट में शामिल
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