सबसे अमीर आईएएस अधिकारी, सिर्फ 1 रुपये लेते हैं पगार, कहलाते हैं ‘जनता के कलेक्‍टर’

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सबसे अमीर आईएएस अधिकारी, सिर्फ 1 रुपये लेते हैं पगार, कहलाते हैं ‘जनता के कलेक्‍टर’

Last Updated:April 05, 2025, 16:41 ISTRichest IAS Officer : क्‍या आपको पता है कि देश का सबसे अमीर आईएएस अधिकारी कौन है और इतने बड़े पद पर होने के बावजूद उन्‍होंने सिर्फ 1 रुपये ही पगार ली है. पीएम मोदी के सामने मीटिंग में काला चश्‍मा लगाकर वे चर्चा…और पढ़ेंगुरुग्राम के रहने वाले अमित कटारिया ने 18वीं रैंक हासिल की थी. हाइलाइट्सअमित कटारिया देश के सबसे अमीर IAS अधिकारी हैं.उन्होंने कई सालों तक सिर्फ 1 रुपये पगार ली.कटारिया को ‘जनता के कलेक्टर’ के रूप में जाना जाता है.नई दिल्‍ली. देश में सबसे बड़ा पद माना जाता है आईएएस ऑफिसर का. इसके इंटरव्‍यू में एक सवाल लगभग सभी कैंडिडेट से पूछा जाता है कि आप सिविल सेवा पास करके क्‍या करेंगे और हर कैंडिडेट का यही सवाल होता है, देश और जनता की सेवा, वह भी निस्‍वार्थ भाव. खैर यह तो हो गया सवाल का जवाब, लेकिन असल में तो सभी को पता है कि आईएएस अधिकारी बनने के बाद ज्‍यादातर पैसे और पॉवर के बीच फंसकर रह जाते हैं. लेकिन, देश में एक आईएएस अधिकारी ऐसे भी हैं जिनका असल में उद्देश्‍य सिर्फ जनता की सेवा करना ही है.

हम बात कर रहे हैं साल 2004 के छत्तीसगढ़ कैडर के IAS अधिकारी अमित कटारिया की. उन्‍हें भारत के सबसे धनी IAS अधिकारी के रूप में सुर्खियों जाना जाता है. अमित की अनुमानित संपत्ति करीब 8.90 करोड़ रुपये है. करोड़ों की संपत्ति के मालिक अमित कटारिया ने आईएएस अधिकारी बनकर जनता की सेवा करने में सबसे ज्‍यादा रुचि दिखाई है और कई साल तक उन्‍होंने पगार के रूप में सिर्फ 1 रुपये ही लिए हैं. अमित कटारिया को अपने बेबाक अंदाज और जनता के कलेक्‍टर के रूप में जाना जाता है.

कहां से की पढ़ाई-कब पास किया एग्‍जामकटारिया का जन्‍म गुरुग्राम, हरियाणा में हुआ और स्कूली शिक्षा दिल्ली पब्लिक स्कूल, आरकेपुरम से पूरी की. इसके बाद उन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बैचलर ऑफ टेक्नोलॉजी की डिग्री हासिल की. उनकी शैक्षणिक उत्कृष्टता ने सिविल सेवाओं में उनके भविष्य के प्रयासों के लिए मजबूत नींव रखी. यही कारण रहा कि उन्‍होंने साल 2003 में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा में 18वीं रैंक हासिल की और 2004 में IAS अधिकारी बने.

छत्‍तीसगढ़ को संवारने में खास भूमिकाकटारिया ने अपने करियर के दौरान छत्तीसगढ़ में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर कार्य किया, जिसमें कई जिलों में जिला कलेक्टर के रूप में सेवाएं भी शामिल हैं. उन्होंने 7 साल की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के दौरान ग्रामीण विकास विभाग में संयुक्त सचिव के रूप में भी सेवा दी. उन्होंने अपनी सेवा के कुछ समय के लिए 1 रुपये का प्रतीकात्मक वेतन ही लिया था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे व्यक्तिगत वित्तीय लाभ से अधिक सार्वजनिक सेवा के प्रति समर्पित हैं. उनकी संपत्ति मुख्य रूप से दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में उनके परिवार के सफल रियल एस्टेट बिजनेस से आती है.

पीएम मोदी के सामने लगा रख था काला चश्‍मायह बात साल 2015 की है, जब अमित कटारिया बस्तर के जिला कलेक्टर थे. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक बैठक में धूप के चश्मे पहनकर मीडिया का ध्यान आकर्षित किया. इसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना गया. इस घटना के कारण राज्य सरकार ने उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया, लेकिन इससे उनकी एक समर्पित सिविल सेवक की छवि पर कोई असर नहीं पड़ा. अमित कटारिया की पत्नी अस्मिता हांडा एक व्यावसायिक पायलट हैं, जो उनके परिवार की पेशेवर उत्कृष्टता को और भी उजागर करती हैं.
Location :New Delhi,DelhiFirst Published :April 05, 2025, 16:41 ISThomebusinessसबसे अमीर आईएएस, सिर्फ 1 रुपये लेते हैं पगार, कहलाते हैं ‘जनता के कलेक्‍टर’

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