चाय वालों ने रोज 30 हजार तो पूड़ी की दुकानों ने 1500 रुपये, कुंभ में किसने कितना कमाया

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चाय वालों ने रोज 30 हजार तो पूड़ी की दुकानों ने 1500 रुपये, कुंभ में किसने कितना कमाया

नई दिल्‍ली. यूपी के प्रयागराज में करीब 2 महीने तक चले महाकुंभ के दौरान सिर्फ सरकार ने ही नहीं, रेहड़ी-पटरी वालों और दुकानदारों ने भी जमकर पैसा कमाया. एक विदेशी एजेंसी ने हाल में आंकड़े जारी कर बताया है कि महाकुंभ के दौरान चाय वालों से लेकर पूड़ी-सब्‍जी की दुकान लगाने वालों तक ने हजारों की कमाई की. पूरे मेले के दौरान करीब 3 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियों का अनुमान लगाया गया है.

ग्‍लोबल डाटा एंड एनालिटिक्‍स कंपनी डन एंड ब्रैडस्ट्रीट ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि यूपी के प्रयागराज में हाल ही में संपन्न हुआ महाकुंभ मेला, असल में एक आर्थिक महाकुंभ भी था, जिससे 2.8 लाख करोड़ रुपये की आर्थिक गतिविधियां उत्पन्न हुईं. रिपोर्ट में कहा गया है कि इस महाकुंभ में करोड़ों लोगों के आने की वजह से बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियां हुई हैं. इसमें से कुछ खर्चे प्रत्‍यक्ष तो कुछ अप्रत्‍यक्ष थे, जबकि कुछ प्रेरित खर्चे भी शामिल हैं.

आंकड़े पहले से भी बेहतरकंपनी ने कहा कि उसने आंकड़ा-आधारित दृष्टिकोण का उपयोग किया है, जिसमें अनुमान लगाने के लिए मालिकाना आर्थिक मॉडलिंग तकनीकों के साथ डेस्क पर किए अनुसंधान को एकीकृत करना भी शामिल है. पहले जारी किए गए कुछ अनुमानों में कुल आर्थिक गतिविधियां दो लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी. अब माना जा रहा है कि आर्थिक उत्पादन में 2.8 लाख करोड़ रुपये का योगदान होने का अनुमान है.

90 हजार करोड़ सीधे तौर पर खर्चरिपोर्ट के अनुसार, प्रत्यक्ष गतिविधियां 90,000 करोड़ रुपये की आंकी गई है. इसमें परिवहन, आवास, भोजन, पर्यटन सेवाएं और स्थानीय वाणिज्य सहित उपस्थित लोगों द्वारा किए गए खर्चे शामिल हैं. अप्रत्यक्ष गतिविधियां भी 80,000 करोड़ रुपये आंकी गई हैं. अप्रत्यक्ष प्रभाव सीधे प्रभावित क्षेत्रों में बढ़ती मांग के प्रति आपूर्ति शृंखला की प्रतिक्रिया से आता है, जैसे कि होटल बुकिंग बढ़ने के कारण आदि. कंपनी ने कहा कि कुंभ के ‘प्रेरित’ प्रभाव के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था के खर्च में वृद्धि हुई है, जिसके कारण श्रमिकों ने आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और दैनिक आवश्यक वस्तुओं में पुनर्निवेश किया है. कंपनी ने कहा कि इससे 1.1 लाख करोड़ रुपये का निवेश होगा.

सबसे ज्‍यादा खर्चा कहांखर्च वर्गीकरण के नजरिये से देखें तो 2.3 लाख करोड़ रुपये को उपभोग व्यय के रूप में चिह्नित किया गया है, जबकि शेष 50,000 करोड़ रुपये बुनियादी ढांचे के निर्माण पर पूंजीगत व्यय है. अकेले परिवहन ने उपभोग व्यय में आधा योगदान दिया और इसे 37,000 करोड़ रुपये आंका गया, जिसमें से सिर्फ रेलवे ने 17,700 करोड़ रुपये कमाए. इसके अलावा तीर्थयात्रियों ने हेलिकॉप्टर जॉयराइड, हॉट एयर बैलून राइड, एटीवी राइड और एडवेंचर स्पोर्ट्स, मनोरंजन पार्क में प्रवेश, योग सत्र और गाइड के साथ शहर घूमने जैसी मनोरंजक गतिविधियों पर भी 10,000 करोड़ रुपये खर्च किए.

खुदरा दुकानदारों की बंपर कमाईरिपोर्ट के अनुसार, खुदरा व्यापार में लगे लगभग दो लाख विक्रेताओं ने 7,000 करोड़ रुपये का कारोबार किया, जबकि खाद्य सेवाओं ने 6,500 करोड़ रुपये कमाए. अकेले चाय की दुकान लगाने वालों ने प्रतिदिन 30,000 रुपये तक कमाई कर डाली, जबकि पूड़ी की दुकान वालों ने कुंभ के दौरान औसतन 1,500 रुपये प्रतिदिन कमाए.

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