नई दिल्ली. भारतीय शेयर में पिछले दो महीने में काफी गिरा. बड़े विदेशी निवेशकों ने माल बेचने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी. लेकिन भारत के छोटे निवेशकों ने इस दौरान जमकर खरीदारी जारी रखी. गिरावट में खरीदारी (Buy on Dip) की रणनीति को फॉलो करके हुए रिटेल निवेशकों ने ताबड़तोड़ स्टॉक खरीदे. अब बड़ी कंपनियों के शेयर जब सस्ते दामों में मिल रहे थे तो छोटे और मझोले निवेशकों ने इस मौके का भरपूर लाभ उठाया.
गौरतलब है कि अक्टूबर और नवंबर में विदेशी निवेशकों की भारतीय बाजार में तगड़ी बिकवाली की थी. FIIs का डेटा कहता है कि दो महीने तक विदेशी निवेशक नेट सेलर बने रहे. इन्हीं दो महीनों के दौरान जब विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 1 लाख करोड़ रुपये का माल बेचा, तब रिटेल निवेशकों ने शॉपिंग एंजॉय की. इन्होंने अक्टूबर में 29,000 करोड़ रुपये और नवंबर में 9,100 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे.
क्या कहते हैं एक्सपर्टमनीकंट्रोल की खबर के मुताबिक, विशेषज्ञ मानते हैं कि खुदरा निवेशकों का ध्यान बाय ऑन डिप की रणनीति पर है. बड़ी कंपनियों के शेयरों की कीमतों में गिरावट ने इन्हें आकर्षक बनाया है, जबकि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर अभी भी ऊंचे स्तर पर बने हुए हैं. यह निवेशकों को चुनिंदा और मजबूत कंपनियों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर देता है.
एफआईआई की बिकवाली की वजह चीन का प्रोत्साहन पैकेज और अमेरिका की “अमेरिका फर्स्ट” नीतियों का प्रभाव रहा. विदेशी निवेशक मजबूत डॉलर और कमजोर भारतीय कॉरपोरेट आय के चलते भारत से दूरी बना रहे हैं. हालांकि, घरेलू निवेशकों की खरीदारी ने बाजार को संभाले रखा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि दिसंबर में बाजार थोड़ी से बढ़त के साथ स्थिर रह सकता है. स्थानीय म्यूचुअल फंड और खुदरा निवेशक बाजार के मुख्य ड्राइवर बने रहेंगे.
Tags: Mutual fund investors, Share market, Stock marketFIRST PUBLISHED : December 5, 2024, 10:53 IST
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