Last Updated:March 26, 2025, 12:49 ISTसुप्रीम कोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अपोलो अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच करने को कहा, और पूछा कि क्या अस्पताल पिछले 5 वर्षों से गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज और अस्पताल के बिस्तर उपलब्ध करा रहा है.हॉस्पिटल की सांकेतिक तस्वीरहाइलाइट्ससुप्रीम कोर्ट ने अपोलो अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच के आदेश दिए.अपोलो अस्पताल को 1 रुपये महीने में जमीन दी गई थी.केंद्र और दिल्ली सरकार को 4 हफ्ते में रिपोर्ट देने का निर्देश.नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली के नामी अस्पताल अपोलो हॉस्पिटल को सरकार ने जमीन देते वक्त कहा था कि वह अस्पताल में 40% ओपीडी रोगियों को निःशुल्क डायग्नोस्टिक सुविधाएं प्रदान करेगा. लेकिन, क्या ऐसा हुआ है इस पर सुप्रीम कोर्ट ने जांच करने को कहा है. उच्चतम न्यायालय ने अपोलो अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच करने और यह पता लगाने के लिए निरीक्षण का आदेश दिया कि क्या अस्पताल पिछले पांच वर्षों से गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज और अस्पताल के बिस्तर उपलब्ध करा रहा है, जो कि अस्पताल के लिए कंपल्सरी लीज डीड की आवश्यकता को पूरा करता है, जिसे प्रति माह 1 रुपये पर जारी किया गया था.
सुप्रीम कोर्ट ने अपोलो अस्पताल चलाने वाली इंद्रप्रस्थ मेडिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें अखिल भारतीय वकील संघ की ओर से दाखिल एक जनहित याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय के 22 सितंबर, 2009 के आदेश को चुनौती दी गई थी. इसमें आरोप लगाया गया था कि अपोलो अस्पताल द्वारा गरीबों को चिकित्सा सुविधाएं प्रदान नहीं की जा रही हैं.
क्या गरीबों को इलाज मिला?
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को एक संयुक्त निरीक्षण दल गठित करने और 4 सप्ताह में रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा, “जांच दल पता लगाए कि क्या अपोलो अस्पताल में गरीब लोगों का इलाज किया जा रहा है या निजी हित के लिए इस जमीन को हड़पा गया है. इस मामले पर उच्चतम स्तर पर चर्चा करें और अगर जरूरत पड़ी तो हम एम्स को अस्पताल चलाने के लिए कहेंगे.”
37 साल पहले हुआ था करार
दरअसल, अप्रैल 1988 में अपोलो समूह ने दिल्ली के उपराज्यपाल के माध्यम से भारत के राष्ट्रपति के साथ एक अस्पताल बनाने के लिए 30 साल के पट्टे पर हस्ताक्षर किए. इस लीज डीड ने अपोलो ग्रुप और उसकी सहयोगी संस्थाओं को सरिता विहार में 15 एकड़ जमीन पर एक मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल बनाने की अनुमति दी.
लेकिन, यह शर्त रखी गई कि 600 बिस्तर वाले मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल के कम से कम एक तिहाई हिस्से में निःशुल्क निदान सुविधाएँ प्रदान करने की जाएं, साथ ही यह भी निर्धारित किया गया कि अस्पताल 40% ओपीडी रोगियों को निःशुल्क निदान सुविधाएँ प्रदान करेगा.
अब सर्वोच्च अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया कि वे अस्पताल में बिस्तरों की संख्या और पिछले पांच सालों के ओपीडी मरीजों के रिकॉर्ड की गणना करने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम नियुक्त करें. आदेश में कहा गया, “हलफनामे में यह बताया जाएगा कि पिछले पांच सालों में राज्य अधिकारियों की सिफारिश पर कितने गरीब मरीजों को इलाज मुहैया कराया गया.”
Location :New Delhi,New Delhi,DelhiFirst Published :March 26, 2025, 12:49 ISThomebusinessअपोलो अस्पताल में गरीबों को मिला मुफ्त इलाज? SC ने दिए जांच के आदेश
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