Last Updated:February 27, 2025, 10:44 ISTBarapullah Bridge Restoration: दिल्ली में मुगलों के जमाने का यह पुल पुराने मथुरा रोड के किनारे खान-ए-खानन के मकबरे से 1 किमी पूर्व में स्थित है. इसके स्पेशल स्ट्रक्चर में 11 मेहराबें हैं जो 12 सपोर्टिंग पिलर पर…और पढ़ेंहाइलाइट्सदिल्ली में 17वीं सदी के बारापुला पुल की मरम्मत शुरू हुई.पुल की दीवारों और संरचना की बहाली का काम जारी है.पुल का निर्माण 1621-22 में मुगल बादशाह जहांगीर के समय हुआ था.नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली में 17वीं सदी के ‘बारापुला पुल’ पुल की मरम्मत का काम शुरू हो गया है, जो कभी मुगलों के आने-जाने का अहम रास्ता हुआ करता था. इस ब्रिज की सपोर्टिंग वॉल पर जीर्णोद्धार का काम शुरू कर दिया गया है. इस पुल के संरक्षित हिस्से में पहली मीनार से निज़ामुद्दीन स्टेशन के प्रवेश द्वार की दिशा में प्रत्येक तरफ 70 मीटर तक फैली दो फुट ऊंची दीवारें शामिल हैं. भारतीय पुरातत्व विभाग की प्रवक्ता नंदिनी भट्टाचार्य साहू ने पुष्टि की है कि उन्होंने दीवार के एक हिस्से की मरम्मत पूरी कर ली है और दोनों छोर पर गेट लगा दिए हैं. यह पुल पुराने मथुरा रोड के किनारे खान-ए-खानन के मकबरे से 1 किमी पूर्व में स्थित है. इसके स्पेशल स्ट्रक्चर में 11 मेहराबें हैं जो 12 सपोर्टिंग पिलर पर टिकी हुई हैं, इसलिए इसे बारापुला (12 खंभे) नाम दिया गया है.
बारापुला पुल 195 मीटर तक फैला है, जिसमें 100 मीटर का पुल, निज़ामुद्दीन स्टेशन की ओर 72 मीटर का सेक्शन तो जंगपुरा की ओर 23 मीटर का सेक्शन शामिल है. यह 14 मीटर चौड़ा है, जिसके प्रत्येक पिलर पर 2 मीटर ऊंची मीनार बनी हुई है.
बनाई जाएगी नई चारदीवारी
अधिकारियों ने बताया कि उन्होंने स्टेशन के प्रवेश द्वार के पास की दीवारों को खोदकर उन्हें बहाल कर दिया है, जो पहले मलबे के नीचे दबी हुई थीं. वे एक नई पैरलल वॉल बनाने की योजना बना रहे हैं, जो एक मीटर ऊंची होगी, जिसके दोनों तरफ 1.2 मीटर की ग्रिल होगी ताकि यहां अनधिकृत पहुंच को रोका जा सके.
पिछले साल, लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्सेना ने बारापुला पुल अतिक्रमण हटाने और ब्रिज की बहाली का निर्देश दिया था. अधिकारियों ने 120 से अधिक अनधिकृत विक्रेताओं को पुल से हटा दिया था, जो लगभग 20 वर्षों से इस स्थान पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे थे. इससे ब्रिज का स्ट्रक्चर खराब हो रहा था, और आस-पास रहने वाले लोग यहां कूड़ा-कचरा डालने लगे थे.
1621-22 में बना था यह पुल
ऐतिहासिक अभिलेखों से पता चलता है कि बारापुला पुल का निर्माण 1621-22 में मुगल बादशाह जहांगीर के दरबार में रहने वाले मिहर बनफी आगा की देखरेख में हुआ था. इसकी जानकारी पुल के एक मेहराब पर लिखी हुई थी, लेकिन अब दिखाई नहीं देती है.
बारापुला ब्रिज का इस्तेमाल मुगल, आगरा से निजामुद्दीन दरगाह और हुमायूं के मकबरे की यात्रा के दौरान यमुना पार करने के लिए करते थे. 1628 तक, पेड़ों से सजी एक चौड़ी सड़क ने पुल को हुमायूं के मकबरे से जोड़ दिया और इस इंफ्रास्ट्रक्चर को दिल्ली का सबसे बेहतरीन पुल माना गया.
Location :New Delhi,New Delhi,DelhiFirst Published :February 27, 2025, 10:44 ISThomebusiness17वीं सदी के पुल की सूरत संवार रही दिल्ली सरकार, मुगलों के जमाने का यह ब्रिज
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