क्या डॉलर के खिलाफ रुपये को खड़ा कर रहा है भारत? जयशंकर ने लंदन में कहा, हमारा टारगेट कुछ और…

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क्या डॉलर के खिलाफ रुपये को खड़ा कर रहा है भारत? जयशंकर ने लंदन में कहा, हमारा टारगेट कुछ और…

Last Updated:March 06, 2025, 10:23 ISTInternationalisation of Rupee : भारत रुपये को वैश्विक स्तर पर मजबूत बना रहा है, लेकिन अमेरिकी डॉलर की जगह लेने का कोई इरादा नहीं है. विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि डॉलर दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है. …और पढ़ेंहाइलाइट्सभारत रुपये को वैश्विक स्तर पर मजबूत बना रहा है.डॉलर की जगह लेने का भारत का कोई इरादा नहीं है.भारत ने कई देशों के साथ रुपये में लेन-देन के तरीके बनाए हैं.Internationalisation of rupee : भारत आज दुनिया में अपनी एक नई पहचान बना रहा है. अब हमारी करेंसी, यानी भारतीय रुपया, भी वैश्विक स्तर पर मजबूत हो रहा है. लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि भारत अमेरिकी डॉलर की जगह लेने की कोशिश कर रहा है? नहीं! विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने साफ कहा है कि भारत का यह लक्ष्य नहीं है. आइए जानते हैं कि यह सब क्या मतलब है और भारत कैसे अपने रुपये को वैश्विक स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहा है.

भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने हाल ही में लंदन के चैथम हाउस में एक भाषण दिया. उन्होंने भारतीय रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण (Internationalisation of Rupee) के बारे में बात की. उन्होंने कहा कि भारत का लक्ष्य अमेरिकी डॉलर की जगह लेना नहीं है. उन्होंने समझाया कि डॉलर दुनिया की प्रमुख करेंसी है और यह अंतरराष्ट्रीय आर्थिक स्थिरता के लिए जरूरी है.

दुनिया को डॉलर की बहुत जरूरतजयशंकर ने कहा, “हमारी कोई नीति नहीं है कि हम डॉलर की जगह लें. डॉलर एक रिजर्व करेंसी है और यह दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए बहुत जरूरी है. आज दुनिया को और ज्यादा आर्थिक स्थिरता की जरूरत है.”

उन्होंने यह भी कहा कि भारत रुपये के वैश्विक उपयोग को बढ़ावा दे रहा है. उन्होंने कहा, “हम सक्रिय रूप से भारत का वैश्वीकरण कर रहे हैं. आज ज्यादा भारतीय विदेश यात्रा कर रहे हैं और विदेश में रह रहे हैं. भारत का व्यापार और निवेश भी बढ़ रहा है. इस वजह से रुपये का उपयोग भी बढ़ेगा.”

जयशंकर ने यह भी बताया कि भारत ने कई देशों के साथ रुपये में लेन-देन के तरीके बना लिए हैं. खासकर उन देशों के साथ जिनके पास डॉलर जैसी करेंसी की कमी है. उन्होंने कहा, “हमने कई देशों के साथ कैशलेस पेमेंट के तरीके बनाए हैं. यह खासकर उन देशों के लिए है जिनके पास डॉलर की कमी है.”

रुपये के अंतरराष्ट्रीयकरण के क्या फायदे होंगे?भारत को अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अमेरिकी डॉलर पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है. यदि रुपया अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में इस्तेमाल होने लगेगा, तो डॉलर की आवश्यकता कम होगी, हालांकि भारत पूरी तरह से डॉलर पर अपनी निर्भरता खत्म करने का इरादा भी नहीं रखता है.

यदि भारतीय रुपया एक इंटरनेशनल करेंसी बनने में सफल होता है तो भारत पर विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटेगा, जिससे आयात और निर्यात में स्थिरता आएगी. भारतीय कंपनियों को आयात के लिए डॉलर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ेगी या कम पड़ेगी, जिससे मुद्रा विनिमय (Exchange Rate) के उतार-चढ़ाव का असर कम होगा और व्यापारिक लागत भी घटेगी.

इसके अलावा, जब रुपये का अंतरराष्ट्रीय लेन-देन बढ़ेगा, तो यह भारत की आर्थिक ताकत को दर्शाएगा और विदेशी निवेशकों का विश्वास बढ़ाएगा. इससे भारतीय वित्तीय बाजारों में पूंजी प्रवाह बढ़ सकता है. साथ ही. जिन देशों के साथ भारत व्यापार करता है, वे यदि रुपये में लेन-देन को स्वीकार करने लगें, तो व्यापारिक प्रक्रियाएं आसान हो जाएंगी और भारत अधिक देशों के साथ सीधा व्यापार कर सकेगा.
Location :New Delhi,New Delhi,DelhiFirst Published :March 06, 2025, 10:23 ISThomebusinessक्या डॉलर के खिलाफ रुपये को खड़ा कर रहा है भारत? क्या होंगे इसके फायदे

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